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PM मोदी ने दिया 'जय अनुसंधान' का नारा, कहा- अंतरिक्ष और समुद्र की गहराई में है भविष्य के समस्याओं का समाधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला के प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए 'जय अनुसंधान' का नारा दिया। उन्होंने कहा कि हमारे भविष्य की समस्याओं का हल अंतरिक्ष और समुद्र की गहराई में है।

Independence Day 2022 PM Narendra Modi gives Jai Anusandhan slogan to push for innovation vva
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New Delhi, First Published Aug 15, 2022, 1:50 PM IST

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोमवार को 'जय अनुसंधान' का नारा दिया। लाल किला पर तिरंगा झंडा फहराने के बाद नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 'जय जवान', 'जय किसान' के साथ 'जय अनुसंधान' का नारा दिया। 

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें 'जय विज्ञान' नारा जोड़ा था। नरेंद्र मोदी ने इसमें 'जय अनुसंधान' जोड़ा है। पीएम ने कहा, "अमृत काल में हमें इनोवेशन को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने जनवरी 2019 में जालंधर में भारतीय विज्ञान कांग्रेस में 'जय अनुसंधान' का नारा दिया था।

लाल किले से मोदी ने डिजिटल इंडिया मूवमेंट की सराहना करते हुए कहा कि UPI BHIM जैसे इनोवेशन ने फिन-टेक की दुनिया में तूफान ला दिया है। उन्होंने कहा, "हमारे नवाचार (innovation) की शक्ति देखें। दुनिया में वित्तीय डिजिटल लेनदेन (financial digital transactions) का चालीस प्रतिशत भारत में होता है।" 

जल्द 5जी युग में कदम रखेगा भारत
मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही 5जी युग में कदम रखेगा। देश ने ऑप्टिक फाइबर बिछाने में भी तेजी से प्रगति की है। डिजिटल इंडिया का सपना गांवों के जरिए साकार होगा। डिजिटल इंडिया मूवमेंट आने वाले दशक में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और जीवन के हर क्षेत्र में बड़े बदलाव लाएगा। एक नई दुनिया उभर रही है। भारत इसमें अहम भूमिका निभाएगा। हमने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में खुद को साबित किया है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि आकांक्षी समाज किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति है। हमारा प्रयास है कि देश के युवाओं को अंतरिक्ष से लेकर समुद्र की गहराई तक सभी क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए हर संभव सहायता मिले। इसलिए हम अपने अंतरिक्ष मिशन और गहरे महासागर मिशन का विस्तार कर रहे हैं। हमारे भविष्य की समस्याओं का समाधान अंतरिक्ष और समुद्र की गहराई में है।

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