भारत ने 14 साल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 33% की कमी की है। भारत का लक्ष्य 2023 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 45 फीसदी कमी लाना है। 

नई दिल्ली। भारत एक ओर जहां तेज रफ्तार से आर्थिक उन्नति कर रहा है। दूसरी ओर हमारा देश पर्यावरण की रक्षा की दिशा में भी बड़ी कामयाबी हासिल कर रहा है। पिछले 14 साल में भारत में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 33% कम हुआ है। संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है।

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रिपोर्ट से पता चला है कि भारत ने 2030 तक 2005 के स्तर से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 45% तक कम करने का लक्ष्य रखा है। वह इस दिखा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) की प्रतिबद्धता को पूरा करने की राह पर है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की प्रत्येक इकाई वृद्धि के लिए होने वाले ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में 2005 से 2019 तक 33% गिरावट आई है।

रिन्यूएबल एनर्जी पर ध्यान दे रहा भारत

2016-2019 में भारत की उत्सर्जन में कमी की औसत दर बढ़कर 3% सालाना हो गई। यह 2014 से 2016 तक लगभग 1.5% थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहा है। पिछले कुछ सालों में भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस किया है। इसके चलते ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम हुआ है।

ग्रीन हाइड्रोजन को भारत में दिया जा रहा बढ़ावा

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो रहा है। इससे पता चलता है कि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से पूरी तरह अलग करने में सक्षम हो गया है। दूसरे अधिकारी ने कहा कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में आई कमी से भारत को विकसित देशों द्वारा कोयले का उपयोग बंद करने के दबाव से बचने में मदद मिलेगी।

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संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने कहा कि भारत एक ओर जहां ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी ला रहा है। वहीं, वन क्षेत्र में वृद्धि कर रहा है। 2019 तक भारत के 24.56% क्षेत्र में जंगल और पेड़ थे। भारत ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।