भारतीय सेना ने कोरोना के खिलाफ जंग में जीत हासिल की है। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर जहां बेकाबू होती जा रही है, हर रोज 3 लाख से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं, वहीं, सेना में संक्रमण की दर लगभग शून्य पर आ गई है। ये सब वैक्सीनेशन प्रोग्राम और कोविड प्रोटोकॉल के आधार पर संभव हो पाया है। खास बात ये है कि ये सब सिर्फ 2 महीने में ही हुआ है। 

नई दिल्ली. भारतीय सेना ने कोरोना के खिलाफ जंग में जीत हासिल की है। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर जहां बेकाबू होती जा रही है, हर रोज 3 लाख से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं, वहीं, सेना में संक्रमण की दर लगभग शून्य पर आ गई है। ये सब वैक्सीनेशन प्रोग्राम और कोविड प्रोटोकॉल के आधार पर संभव हो पाया है। खास बात ये है कि ये सब सिर्फ 2 महीने में ही हुआ है। 

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेना में प्रतिदिन 50-60 से भी कम मामले सामने आ रहे हैं। इनमें भी ज्यादातर वे लोग हैं, जो अपने परिवारों के साथ बाहर रहने के चलते संक्रमित हुए हैं। इसके अलावा अभी 400 सैन्य कर्मी होम आइसोलेशन में हैं। अब तक सेना में 14 लाख जवानों में 99% को वैक्सीन दी जा चुकी है। वहीं, इनमें से 82% को दूसरा डोज भी लग चुका है। 

कोविड सेंटर बने बेस हॉस्पिटल 
सेना ने जवानों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए 22 अप्रैल से दिल्ली के बेस हॉस्पिटल को कोरोना सेंटर में बदल दिया। यहां 258 बेड पर मरीजों को एडमिट किया गया है। इसमें ऑक्सीजन सुविधा भी उपलब्ध है। इतना ही नहीं सेना ने एक हजार बिस्तरों वाला अपना अस्पताल भी आम जनता के लिए खोल दिया है।

इन शहरों में भी बन रहे हॉस्पिटल
हाल ही में रक्षा मंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग में सेना और डीआरडीओ को आगे आने के लिए कहा था। ऐसे में सेना ने डीआरडीओ की मदद से पटना में अपना 500 बेड वाला अस्पताल खोल दिया है। वहीं, लखनऊ में 450 बेड, वाराणसी में 750 बेड और अहमदाबाद में 900 बेड का अस्पताल भी खोल दिया है।