सूत्रों के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों ने लोकसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी को अपने-अपने देश में आमंत्रित किया।

पीएम मोदी ने पुतिन-जेलेंस्की से की बात। आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के पहले पीएम मोदी ने बुधवार (20 मार्च) को रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से बात की। उन्होंने दोनों देशों के बीच जारी युद्ध के बीच शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता की बात दोहराई। सूत्रों के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों ने लोकसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी को अपने-अपने देश में आमंत्रित किया। एक्स पर एक पोस्ट पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पुतिन से बात की और उन्हें रूस के राष्ट्रपति के रूप में दोबारा चुने जाने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा, "हम आने वाले वर्षों में भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा और विस्तारित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए।

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प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य एक्स पोस्ट पर जानकारी दी कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भारत-यूक्रेन साझेदारी को मजबूत करने पर बात की। उन्होंने कहा कि शांति के लिए सभी प्रयासों और चल रहे संघर्ष को जल्द खत्म करने के लिए भारत के लगातार समर्थन से अवगत कराया। भारत हमारे जन-केंद्रित दृष्टिकोण द्वारा निर्देशित मानवीय सहायता प्रदान करना जारी रखेगा।"

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यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने दी PM मोदी को लेकर दी जानकारी

पीएम मोदी के साथ हुई बातचीत को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि मैंने यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, मानवीय सहायता और शांति फॉर्मूला बैठकों में सक्रिय भागीदारी के लिए भारत के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की।ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन भारत के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में रुचि रखता है, विशेष रूप से एग्रीकल्चर, फार्मास्युटिकल जैसे व्यापार में।उन्होंने यह भी कहा कि कीव भारतीय छात्रों का यूक्रेनी शैक्षणिक संस्थानों में वापस स्वागत करना चाहता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद भारत सरकार ने छात्रों को भारत लेकर आ गया था।

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जी20 शिखर सम्मेलन में युद्ध को लेकर बात

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण पर वैश्विक आक्रोश के बावजूद भारत ने युद्ध पर राजनीतिक तटस्थता बनाए रखी है। जबकि भारत ने पुतिन के कार्यों की आलोचना करने वाले कई संयुक्त राष्ट्र वोटों से परहेज किया है। वहीं भारत ने स्थिति पर अपनी असुविधा व्यक्त करने से परहेज नहीं किया है। इसने यूक्रेन पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में समर्थन के लिए रूस के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ अत्याचार की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक बैठक में इस बात पर जोर दिया था कि आज का युग युद्ध का युग नहीं है। इसके बाद जी 20 शिखर सम्मेलन की प्रेस रिलीज में भी यह भावना व्यक्त की गई।

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