पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित करने से पाकिस्तान में जल संकट गहरा गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करता रहेगा, तब तक संधि स्थगित रहेगी।

Indus Waters Treaty: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने हमला कर 26 लोगों की जान ले ली। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि (IWT) स्थगित कर दिया। इसका असर दिखने लगा है। पाकिस्तान जल संकट का सामना कर रहा है। सूत्रों के अनुसार उसने एक के बाद एक चार पत्र लिखकर भारत से अनुरोध किया है कि सिंधु जल संधि निलंबित रखने के फैसले पर पुनर्विचार करें।

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6-7 मई की रात भारत की सेनाओं ने पहलगाम का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंक के 9 अड्डों को तबाह किया गया। इसके बाद भी पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर एक पत्र लिखा था।

भारत ने साफ कहा- खून और पानी साथ नहीं बह सकते

भारत ने पाकिस्तान से साफ कहा है कि टेरर और ट्रेड एक साथ नहीं हो सकते। खून और पानी भी एक साथ नहीं बह सकते। सिंधु जल संधि सद्भावना और मैत्रीपूर्ण भावना से बनाई गई थी। इससे पाकिस्तान को अधिक लाभ मिल रहा था। पाकिस्तान ने सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर इसकी भावना के खिलाफ काम किया है। यही वजह है कि भारत ने इसे स्थगित कर दिया है।

पाकिस्तान ने आतंकवाद को समर्थन दिया तो स्थगित रहेगी सिंधु जल संधि

भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहेगा तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी। 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था, सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) ने इस कदम का समर्थन किया था। यह पहली बार था जब नई दिल्ली ने विश्व बैंक की मध्यस्थता वाले समझौते पर रोक लगाई थी।

सिंधु बेसिन है पाकिस्तान की जीवन रेखा

ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद हुए सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज सरफराज ने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की अपील की है। दूसरी ओर पाकिस्तान के कई लोगों को डर लग रहा है कि भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित रखी तो उनके देश के लोग भूखे मर जाएंगे। पाकिस्तान के सीनेटर सैयद अली जफर ने मई में कहा था, “अगर हमने जल संकट का समाधान नहीं किया तो हम भूख से मर जाएंगे। सिंधु बेसिन हमारी जीवन रेखा है। हमारे पानी का तीन-चौथाई हिस्सा देश के बाहर से आता है। 10 में से 9 लोग अपने जीवन के लिए सिंधु जल बेसिन पर निर्भर हैं। हमारी 90 प्रतिशत फसलें इसी पानी पर निर्भर हैं। हमारी सभी बिजली परियोजनाएं और बांध इसी पर बने हैं। यह हमारे ऊपर लटके पानी के बम की तरह है और हमें इसे निष्क्रिय करना होगा।”