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Good News: भारत में पहली बार जन्मा 'टेस्ट ट्यूब बेबी' भैंसा, PM मोदी ने किया था इस बन्नी नस्ल का जिक्र

भारत में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान की (In vitro fertilization-IVF) तकनीक से टेस्ट ट्यूब भैंस के बछड़े का जन्म हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल गुजरात दौरे पर गए PM मोदी ने इस बन्नी नस्ल के बारे में चर्चा की थी।

Insemination of buffalo for the first time in India with IVF technique
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New Delhi, First Published Oct 23, 2021, 3:37 PM IST
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नई दिल्ली. भारत में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान की (In vitro fertilization-IVF) तकनीक से टेस्ट ट्यूब भैंस के बछड़े का जन्म हुआ है। यह भैंस बन्नी नस्ल की है। इसके साथ ही भारत में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक अगले स्तर पर पहुंच गई। पहला टेस्ट ट्यूब बछड़ा बन्नी नस्ल की भैंस के 6 बार IVF गर्भाधान के बाद पैदा हुआ। यह प्रक्रिया सुशीला एग्रो फार्म्स के किसान विनय एल. वाला के घर जाकर पूरी की गई। यह फार्म गुजरात के सोमनाथ जिले के धनेज गांव में स्थित है।

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प्रधानमंत्री ने गुजरात विजिट के दौरान इस नस्ल का जिक्र किया था
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 15 दिसंबर, 2020 को गुजरात के कच्छ इलाके का दौरा किया था, तब उन्होंने बन्नी भैंस की नस्ल के बारे में चर्चा की थी। उसके अगले ही दिन, यानी 16 दिसंबर, 2020 को बन्नी भैंसों के अंडाणु निकालने (OPU) और उन्हें विकसित करके भैंस के गर्भशय में स्थापित करने (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन-IVF) की प्रक्रिया शुरू करने कि योजना बनाई गई।

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इस तरह हुई प्रक्रिया
वैज्ञानिकों ने विनय एल. वाला के गुजरात के सोमनाथ जिले के धनेज स्थित सुशीला एग्रो फार्म्स की बन्नी नस्ल की तीन भैंसों को गर्भाधान के लिये तैयार किया। वैज्ञानिकों ने भैंस के अंडाशय से डिम्ब निकालने के उपकरण (इंट्रावैजिनल कल्चर डिवाइस-IVC) द्वारा 20 अंडाणु निकाले। तीनों में से एक भैंस के कुल 20 अंडाणुओं को आईवीसी प्रक्रिया से निकाला गया।

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20 अंडाणुओं में से 11 ही भ्रूण बने
वास्तव में एक डोनर से निकाले जाने वाले 20 अंडाणुओं में से 11 भ्रूण बन गये। नौ भ्रूणों को स्थापित किया गया, जिनसे तीन आईवीएफ गर्भाधान वजूद में आये। दूसरे डोनर से पांच अंडाणु निकाले गये, जिनसे पांच भ्रूण (शत प्रतिशत) तैयार हुये। पांच में से चार भ्रूणों को स्थापित करने के लिए चुना गया और इस प्रक्रिया से दो गर्भाधान हुये। तीसरे डोनर से चार अंडाणु निकाले गये, दो भ्रूणों को विकसित किया गया और उन्हें स्थापित करके एक गर्भाधान हुआ।

पशुधन मामले में एक क्रांति साबित होगी
कुल मिलाकर 29 अंडाणुओं से 18 भ्रूण विकसित हुए। इसकी बीएल दर 62 प्रतिशत रही। पंद्रह भ्रूणों को स्थापित किया गया और उनसे छह गर्भाधान हुये। गर्भाधन दर 40 प्रतिशत रही। इन छह गर्भाधानों में से पहला आईवीएफ बछड़ा पैदा हुआ। यह देश का पहला बन्नी बछड़ा है, जो कृत्रिम गर्भाधान की आईवीएफ तकनीक से पैदा हुआ है। सरकार और वैज्ञानिक समुदाय को भैंसों की आईवीएफ प्रक्रिया में अपार संभावना नजर आ रही है और वे देश के पशुधन में सुधार लाने के लिए प्रयासरत हैं। 

जानिए क्या है IVF
जब कोई महिला मां नहीं बन पाती है, तो उसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट (IVF) के जरिये गर्भाधारण कराया जाता है। इससे जन्मे बच्चे को टेस्ट-ट्यूब बेबी भी कहते हैं। इस प्रक्रिया का प्रयोग पहली बार 1978 में इंग्लैंड में किया गया था। आईवीएफ ट्रीटमेंट में प्रयोगशाला में कुछ विशेष परिस्थितियों के साथ महिला के एग्स और पुरुष के स्पर्म को मिलाया जाता है। जब संयोजन से भ्रूण बन जाता है, तब उसे वापस महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। किसी जानवर में भारत में IVF पहली बार प्रयोग किया गया है।

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