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5 मार्च तक हो जाएगा जम्मू-कश्मीर का परिसीमन, 6 से 9 जुलाई तक राज्य के दौरे पर रहेगा आयोग

धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पर तेजी से काम शुरू हो गया था। माना जा रहा है कि 5 मार्च,2022 से पहले परिसीमन हो जाएगा।

Jammu and Kashmir, the work of delimitation will be completed before March 5, 2022 kpa
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Jammu and Kashmir, First Published Jul 5, 2021, 9:43 AM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर परिसीमन की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है। सूत्रों के अनुसार परिसीमन अपनी तय समय सीमा से पहले; यानी 5 मार्च,2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह परिसीमन चार आधार पर होगा। अभी इस बारे में विस्तृत जानकारी आना बाकी है। बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा दी थी। इसके बाद इसी 24 जून को प्रधानमंत्री एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।

6-9 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के दौरे पर रहेगा परिसीमन आयोग
परिसीमन आयोग 6-9 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के दौरे पर रहेगा। 24 जून की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा था कि केंद्र जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और क्षेत्र में विधानसभा चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। परिसीमन आयोग 8 जुलाई को जम्मू के होटल रेडिसन ब्लू में राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधमंडल से मिलेगा। वो उनकी सुझाव और आपत्तियां जानेगा। इस बैठक में राज्य की सभी प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, भाजपा, नेकां, पीडीपी, अपनी पार्टी, सीपीआई, पैंथर्स पार्टी आदि को बुलावा भेजा गया है।

वर्षों से विसंगतियों को ठीक नहीं किया गया
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का इस संबंध में एक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया का उद्देश्य हर वर्ग को विधानसभा क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है। श्री सिंह ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर अन्य राज्यों से अलग है, क्योंकि यहां की विधानसभा सीटों की विसंगतियों को सालों से ठीक नहीं किया गया है।

आखिरी परिसीमन 1995 में हुआ था
जम्मू-कश्मीर में आखिरी परिसीमन 1995 में हुआ था। बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के पास होने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया है। लद्दाख के अलग होने से जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 107 विधानसभा सीटें रह गई हैं। इनमें 24 पाक अधिकृत कश्मीर में आती हैं। जबकि 46 कश्मीर और 37 जम्मू में आती हैं।

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