हमले के बाद भागते हुए दोनों आतंकवादियों ने अपने एलओसी पार आकाओं से बातचीत करने के लिए कुछ ग्रामीणों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था।

Pakistan terrorist: पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने के पाकिस्तानी साजिश का खुलासा हुआ है। एक सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि इस साल 1 व 2 जनवरी को राजौरी के ऊपरी डांगरी गांव में हुए आतंकी हमले में दो पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल रह। यह दोनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

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जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में रह रहे तमाम हैंडलर

हमले के बाद भागते हुए दोनों आतंकवादियों ने अपने एलओसी पार आकाओं से बातचीत करने के लिए कुछ ग्रामीणों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था। इनमें से कुछ हैंडलर जो एलओसी के उस पार और जम्मू-कश्मीर के अंदर के क्षेत्रों में रह रहे हैं उनकी पहचान की जा चुकी है।

15 लाख का इनाम है आतंकवादियों पर...

पिछले दो महीने से पुलिस और सुरक्षा बल राजौरी जिले में संदिग्ध हत्यारों की लगातार तलाश कर रही है। उनकी गिरफ्तारी या हत्यारों का विवरण देने वालों को 15 लाख रुपये के नकद पुरस्कार का ऐलान सरकार ने किया है।

आतंकियों का अंतिम ठिकाना कालाकोट उपमंडल

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों का अंतिम ज्ञात ठिकाना डांगरी से सड़क मार्ग से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर कालाकोट उप-मंडल की तरयात तहसील में नरला गांव था। आतंकवादी 14-15 जनवरी को दो परिवारों से मिलने गए थे और खाना मांग कर खाया था।

दो दिनों का खाना पैक कराया और चेतावनी देकर छोड़ा

सूत्रों ने बताया कि आतंकवादी पहली बार 14 जनवरी की शाम करीब 7-8 बजे नरला बंबल पंचायत के वार्ड 4 के एक घर में पहुंचे और परिवार से खाना मांगा। खाना खाने के बाद इन लोगों ने दो दिनों के लिए खाना पैक कराया। परिवार को पुलिस या सुरक्षा बलों को सूचित न करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया। सूत्रों ने कहा कि अगली शाम आतंकवादी वार्ड 5 के एक घर में आए। वहीं खाना खाया। यहां तीन दिनों के लिए खाना पैक कराया गया और जाने से पहले उन्होंने पाकिस्तान में अपने आका से बात किया। इसके लिए उस परिवार के एक सदस्य के मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल किया। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले डिवाइस पर टेलीग्राम एप डाउनलोड किया।

यहां भारी मात्रा में हथियार बरामद हो चुका

राजौरी जिले की नरला बंबल पंचायत रियासी जिले से लगती है। यहां स्थानीय लोगों ने पिछले साल दो भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों को पकड़ा था, जिसमें एक लश्कर कमांडर तालिब हुसैन भी शामिल था।

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