हर साल बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में मलेरिया जैसी घातक बीमारी से हजारों बच्चे पीड़ित होते हैं। ऐसे में जेएनयू के वैज्ञानिकों ने तपेदिक और मलेरिया से निपटने के लिए एक वैक्सीन तैयार की है। यह टीका काफी प्रभावशाली है। 

नेशनल डेस्क। गर्मी और उमस भरा सीजन लोगों का पसीना निकाल रहा है। लेकिन अगले 15 से 20 दिनों में मानसून भी आने वाला है। बारिश के साथ ही मच्छरों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों की दस्तक भी बढ़ेगी। मलेरिया की रोकथाम और इस घातक बीमारी से लड़ने के लिए JNU के वैज्ञानिकों ने एक खास वैक्सीन तैयार की है। यह रिसर्च सेल प्रेस की ओर से आईसाइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। जेएनयू की प्रोफेसर शैलजा सिंह और प्रोफेसर आनंद रंगनाथन की ओर से ये खास रिसर्च किया गया है।

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सेल प्रेस की ओऱ से आईसाइंस जर्नल में प्रकाशित उनके रिसर्च में डेवलप वैक्सीन परजीवी के विकास के लिए परजीवी के प्रोहिबिटिन प्रोटीन को एक नए लक्ष्य के रूप में प्रस्तावित करता है। 

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2022 में दुनिया भर में मलेरिया के 249 मिलियन केसऔर 60,800 मौतें
मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के कारण फैलने वाले वेक्टर जनित बीमारी है। मलेरिया के कारण पहले लाखों लोगों की जान जा चुकी है। मलेरिया को जड़ से खत्म करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। काफी प्रयासों के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2022 की रिपोर्ट बेहद चौंका देने वाली खतरनाक रिपोर्ट पेश करतेी है। इसमें दुनिया भर में मलेरिया के 249 मिलियन मामलों के साथ 60,800 मौतें हुई हैं।

जेनयू टीम ने क्या किया है?
स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन, जेएनयू में प्रोफेसर शैलजा सिंह और प्रो. आनंद रंगनाथन के सुपरविजन में रिसर्च टीम ने एक नए होस्ट परजीवी इंटरैक्टिंग कॉम्प्लेक्स की खोज की है। यह एक सफल और प्रभावशाली वैक्सीन रणनीति की शुरुआती कुंजी हो सकती है। प्रो. सिंह ने बताया कि रिसर्च में हमने नए PHB2-Hsp70A1A रिसेप्टर लिगैंड जोड़ी की पहचान की है जो परजीवी को मानव मेजबान के अंदर संक्रमित करता है। परजीवी प्रोटीन PHB2 इसलिए एक पावरफुल टीका है। 

रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि मेरोजोइट सतह पर पाया जाने वाला PfPHB2 प्रोटीन, लाल रक्त कोशिका सतह हीट-शॉक प्रोटीन Hsp70A1A के साथ मिलकर क्रिया करता है। एंटी बॉडी ट्रीटमेंट ने इस एंटीबॉडी इलाज ने इस अंतःक्रिया को रोका है। इससे मलेरिया पैरासाइट के जीवाणु खत्म हो जाएंगे।