भारतीय रेलवे ने ट्रेन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 'कवच' नामक एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लागू की है। इस प्रणाली से दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ी है। कवच, रेलवे के लिए एक गेमचेंजर साबित हो रहा है।

Kavach for Indian Railways: भारतीय रेलवे, देश के परिवहन की लाइफलाइन है। देशवासियों की सुरक्षित यात्रा के लिए कवच एक वरदान साबित हो रहा। ट्रेन यात्रा करने वाले लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे कवच सिस्टम ने एक्सीडेंट्स और कैजुआलिटी कम करने में गेमचेंजर साबित हो रहा। भारतीय रेलवे ने पांच सालों में देश के रेलवे नेटवर्क में 45000 किलोमीटर तक कवच लगाने का फैसला किया है।

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7335 रेलवे स्टेशनों वाला 1.3 लाख किलोमीटर का रेल नेटवर्क

भारत में रेल नेटवर्क आम से लेकर खास लोगों के परिवहन की लाइफलाइन है। देश में रेल 1.3 लाख किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर फैली हुई है और यह 7,335 स्टेशनों को जोड़ती है। रोजाना औसतन 23 मिलियन पैसेंजर्स इसकी सर्विस लेते हैं।

लेकिन रेल एक्सीडेंट्स समय-समय पर देश को झकझोरता रहा...

भारतीय रेलवे सुरक्षा से जुड़ी तमाम चुनौतियों का प्रतीक रहा है। आए दिन होने वाली रेल दुर्घटनाओं ने समय समय पर रेलवे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी जाहिर की है। आए दिन एक्सीडेंट्स के बाद रेलवे की सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे। ऐसे में भारतीय रेलवे ने कवच सिस्टम को अपनाने का फैसला किया।

क्या है कवच?

कवच, एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) टेक्निक पर आधारित है। एचबीएल पावर सिस्टम, केर्नेक्स और मेधा जैसी भारतीय कंपनियों के सहयोग से आरडीएसओ द्वारा बनाया गया कवच ट्रेन दुर्घटनाओं को खत्म करने के उद्देश्य से एक अभूतपूर्व पहल है। यह सिस्टम ट्रेन की गति पर नज़र रखती है। संभावित खतरों के बारे में ऑपरेटरों को सचेत करती है। ज़रूरत पड़ने पर ऑटोमैटिक तरीके से ट्रेनों को रोकती है। प्रतिकूल मौसम में भी यह ट्रेनों को आपरेट करने में मदद करती है।

क्या है कवच का प्रभाव?

भारतीय रेलवे में कवच लागू होने के बाद काफी परिवर्तन भी दिखा। रेलवे द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो 2000-01 में 473 एक्सीडेंट्स से घटकर 2023-24 में सिर्फ़ 40 रह गई है। 

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