केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ 53 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन पर डटे किसानों ने सरकार और सुप्रीम कोर्ट की सभी दलीलें ठुकराते हुए 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च निकालने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि किसान दिल्ली-एनसीआर बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को किसानों की मीटिंग के बाद कहा कि सरकार को कृषि कानून वापस लेने ही पड़ेंगे। टिकैत ने 2024 तक आंदोलन करते रहने की बात भी कही है।

नई दिल्ली. मुद्दा सुलझ जाने तक कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाने और सुझाव के लिए कमेटी गठित होने के बावजूद किसान आंदोलन पर डटे हैं। आंदोलन के 53वें दिन किसानों ने 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान कर दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रैली को अनुमति नहीं दी है। किसान नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से नई कमेटी गठित करने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को किसानों की मीटिंग के बाद कहा कि सरकार को कृषि कानून वापस लेने ही पड़ेंगे।

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कमेटी के पास नहीं जाएंगे किसान
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा किसान सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी के पास नहीं जाएंगे। किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 19 जनवरी को होने वाली बैठक से पहले कहा कि कृषि कानूनों पर बिंदुवार चर्चा होगी, लेकिन कानून वापस नहीं होंगे।

 तो 2024 तक आंदोलन चलता रहेगा
नागपुर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को कहा कि केंद्रीय कानूनों के खिलाफ किसान मई 2024 तक आंदोलन को तैयार हैं। मीडिया से चर्चा करते हुए टिकैत ने कहा कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी चाहते हैं। किसान 26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बता दें कि देश में अगले लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2024 के आसपास होंगे। उधर, किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी(NIA)के सामने पूछताछ के लिए जाने से मना कर दिया है। उन्होंने इसके पीछे निजी कारण बताए हैं।

मंत्री ने पूछा-धरना किसलिए

इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अमल पर रोक लगा दी है, फिर किसान धरने पर क्यों बैठे हैं? अगर उनकी कोई दूसरी मांग है, तो बताई जाए, सरकार उस पर चर्चा करने का तैयार है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसान यूनियनों को एक प्रस्ताव भेजा था। इसमें मंडियों, व्यापारियों के पंजीकरण और अन्य आशंकाओं को दूर करने की बात कही गई थी। वहीं, सरकार पराली जलाने और बिजली जैसे कानून पर भी बातचीत को सहमत थी। लेकिन किसान कानून निरस्त कराना चाहते हैं। तोमर ने कहा कि कोई कानून पूरे देश के लिए बनता है। किसान सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई कमेटी में अपनी बात रखी सकती है। 

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