कोलकाता डॉक्टर रेप और मर्डर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के हंसने पर जस्टिस एसजी मेहता ने उन्हें फटकार लगाई। जस्टिस मेहता ने कहा कि यह गंभीर मामला है और किसी ने अपनी जान गंवाई है।

नेशनल न्यूज। कोलकाता डॉक्टर रेप और मर्डर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस दौरान कपिल सिब्बल का कोर्ट में शर्मनाक व्यहार सामने आया। कोर्ट में गुरुवार को कोलकाता हॉरर केस में जब दलीलें पेश की जा रही थी तब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल हंस रहे थे जिस पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। यह भी कहा कि इतना गंभीर मामला है इस की सीरियसनेस को तो समझिए। कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।

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किसी ने अपनी जान गवाई है, हंसिए मत
कोलकाता केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कपिल सिब्बल को हंसने पर फटकार लगाई। जस्टिस एसजी मेहता ने कहा, ‘सिल्बल जी ये काफी गंभीर मामला है। किसी ने अपनी जान गंवाई है। हंसिए मत। कोर्ट चल रही है।’ सॉलिसिटर जनरल एसजी मेहता ने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में एक डॉक्टर से रेप और हत्या हुई है। इस केस की गंभीरता को तो समझना चाहिए।

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सोशल मीडिया पर सिब्बल की किरकिरी
सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल की बेशर्मी पर एक्स यूजर ने कमेंट पोस्ट किया है, ‘शर्मनाक व्यवहार।’ एक अन्य यूजर ने लिखा है, “असंवेदनशील सिब्बल। जज न्याय दिलाने में राज्य पुलिस की अक्षमता पर टिप्पणी कर रहे हैं और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल हंस रहे हैं और स्थितियों का मजाक उड़ा रहे हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा है कि सिब्बल भी बेशर्मी से पीड़िता के पिता से देर से एफआईआर कराने को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

जजों की पीठ ने पुलिस के रवैये पर उठाया सवाल
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कोलकाता मामले को हैंडल करने के पुलिस के तरीके को ढीला ढाला और परेशान करने वाला। खासकर पोस्टमार्टम के समय पर सवाल उठाया क्योंकि आधिकारिक तौर पर इसे अप्राकृतिक मौत का मामला बाद में दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम 9 अगस्त को शाम 6:10 बजे से 7:10 बजे के बीच हुआ, जबकि पुलिस ने उसी रात 11:30 बजे मामला दर्ज किया था।

अंतिम संस्कार के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी
एसजी मेहता ने बताया कि पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार करने के बाद पिता ने मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह भी बताया कि राज्य की पुलिस ने पहले पीड़ित के परिवार को आत्महत्या बताकर पीड़ित के परिवार को गुमराह किया था। एक हत्या उन्होंने पीड़िता के दोस्त के मामले को छिपाने के संदेह पर भी प्रकाश डाला, जिसके कारण पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने की मांग उठी।

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