लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पंजाब में अकाली दल और भाजपा के साथ गठबंधन नहीं होगा। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भाजपा और पंजाब के शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन नहीं होगा। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद मंगलवार को भाजपा ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

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पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने जा रही है। अकाली दल पहले एनडीए में शामिल था। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ इसने 2020 में एनडीए से नाता तोड़ा था।

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सीट शेयरिंग को लेकर नहीं हुआ समझौता

भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन नहीं होने की मुख्य वजह सीट शेयरिंग को लेकर एकमत नहीं होना है। कौन सी पार्टी कितने सीट पर चुनाव लड़ेगी इसको लेकर समझौता नहीं हो सका। पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं। अकाली चाहता था कि वह 9 सीटों पर चुनाव लड़े। इस तरह भाजपा के लिए चार सीट बच रहे थे। भाजपा को यह मंजूर नहीं था।

सूत्रों के अनुसार पार्टी कम से 7-8 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी। भाजपा का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बहुत अधिक है। इसलिए पंजाब में उन्हें कम से कम 5 सीटों पर जीत मिलेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल मिलकर मैदान में उतरे थे। दोनों पार्टियों को 2-2 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को आठ सीटों पर जीत मिली थी। आम आदमी पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी।

किसानों के मुद्दे पर भी नहीं बनी सहमति

केंद्र सरकार के खिलाफ किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एमएसपी की गारंटी के लिए कानून और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों में पंजाब के किसान अधिक हैं। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एनडीए से अलग होने वाले अकाली दल के लिए लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ गठबंधन करना मुश्किल हो रहा था। अकाली दल ने एमएसपी की गारंटी को लेकर भाजपा से मांग की थी, लेकिन इसपर दोनों पार्टियों के बीच सहमति नहीं बनी।

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जेल में बंद सिखों का भी है मुद्दा

आकाली दल की मांग है कि खालिस्तान आंदोलन के लिए जेल में डाले गए ऐसे सिख जिनकी सजा की अवधी पूरी हो गई है उन्हें रिया किया जाए। इस मुद्दे पर भाजपा के साथ उनके विचार मेल नहीं आ रहे हैं।

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