मालदीव भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है और उसके पास केवल 45 दिनों के आयात के लिए ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। राष्ट्रपति मुइज्जू को भारत से बेलआउट पैकेज की उम्मीद है, लेकिन क्या भारत अपने पड़ोसी देश की मदद करेगा?

नई दिल्ली। मालदीव इन दिनों भारी वित्तीय संकट में है। इस देश के पास सिर्फ इतना पैसा है कि 45 दिन तक विदेश से जरूरी सामान आयात कर सके। इतने दिनों में पैसे का प्रबंध नहीं हुआ तो भारी परेशानी खड़ी हो जाएगी। इसे देखते हुए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत आ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि भारत से बेलआउट पैकेज मिल जाएगा।

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पिछले साल मालदीव में सत्ता में आने के बाद मुइज्जू की यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है। चुनाव के दौरान मुइज्जू ने 'India out policy' रखने का अभियान चलाया था। उनके सत्ता में आने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद छिड़ गया था। सत्ता में आते ही उन्होंने भारत से कहा था कि मालदीव से अपने सैनिकों को वापस बुला लें।

मालदीव की सरकार से जुड़े लोगों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपमानजनक बातें की थी। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। धीरे-धीरे मुइज्जू और उनके लोगों को अंदाजा हुआ कि मालदीव अपने विशाल पड़ोसी की अनदेखी नहीं कर सकता। इसका मुख्य कारण यह है कि सितंबर में मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 440 मिलियन डॉलर (3697 करोड़ रुपए) था। इतने से सिर्फ डेढ़ महीने आयात हो सकता है।

भारत के बेलआउट से बढ़ेगा मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार

पिछले महीने मूडीज ने मालदीव की क्रेडिट रेटिंग घटा दी थी। कहा था कि "डिफॉल्ट जोखिम बहुत बढ़ गया है"। भारत से बेलआउट मिलने पर मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को मदद मिलेगी।

मालदीव में परंपरा रही है कि सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले भारत आते हैं। मुइज्जू ने ऐसा नहीं किया। वह सबसे पहले तुर्की फिर चीन गए। मुइज्जू की बीजिंग यात्रा को भारत के प्रति कूटनीतिक अपमान के तौर पर देखा गया था। नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मुइज्जू को आमंत्रित किया था। उनके निमंत्रण पर मुइज्जू नई दिल्ली आए थे।