बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनकी पार्टी UCC (Uniform Civil Code) के खिलाफ नहीं है। इसे जबरन थोपना सही नहीं है। वह यूसीसी लागू करने के भाजपा के तरीके को पसंद नहीं करतीं।

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि UCC (Uniform Civil Code) जबरन थोपना सही नहीं है। हमारी पार्टी इसे लागू करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे सहमति से लाया जाना चाहिए।

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मायावती ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समान नागरिक संहिता पर अपनी पार्टी बीएसपी (बहुजन समाज पार्टी) का स्टैंड साफ किया। उन्होंने कहा, "भारत विशाल आबादी वाला देश है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध आदि विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। इनके रहन-सहन और जीनवशैली के अलग-अलग तौर- तरीके, नियम और रश्म-रिवाज हैं। इन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।"

मायावती बोलीं, UCC से बढ़ेगा सामाजिक सद्भाव
मायावती ने कहा, "दूसरी तरफ यह बात भी काफी हद तक सोचने वाली है कि यदि यहां सभी धर्मों को मानने वाले लोगों पर हर मामले में एक समान कानून लागू होता है तो उससे देश कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत होगा। इसके साथ ही लोगों में सामाजिक सद्भाव और भाईचारा पैदा होगा। ये बात भी सच है। इसे ध्यान में रखकर भारतीय संविधान की धारा 44 में समान नागरिक संहिता बनाने के प्रयास का जिक्र किया गया है, लेकिन इसे जबरन थोपने का प्रावधान बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के संविधान में निहित नहीं है।"

UCC लागू करने के भाजपा के तरीके से सहमत नहीं बसपा: मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, "इसके लिए जागरुकता और आम सहमति को श्रेष्ट माना गया है। इसपर अमल नहीं कर, इसकी ओट में संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति करना देशहित में नहीं है। जो इस समय की जा रही है। संविधान में UCC बनाने का जिक्र है, लेकिन थोपने का नहीं। इसे ध्यान में रखकर ही बीजेपी को देश में UCC लागू करने के लिए कोई कदम उठाना चाहिए। हमारी पार्टी UCC लागू करने के खिलाफ नहीं है। हमारी पार्टी भाजपा और इनकी सरकार द्वारा इसे देश में लागू करने के तौर-तरीके से सहमत नहीं है।