केरल में पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर को किसी डॉग हाउस में रहते पाया गया। वह उस डॉग का हर महीने 500 रुपये किराया भी चुकाता है। जानकारी पर लोगों ने इसकी सूचना नगर निगम को भी दी है ।  

नेशनल डेस्क। केरल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। इसमें पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर को केरल के एर्नाकुलम स्थित स्मॉल पेट हाउस में रहते हुए देखा गया है। बेहद छोटे से घर में किराए पर रह रहा है जो कि वास्तव में एक डॉग हाउस है। और खास बात ये है कि वह इस डॉग हाउस का हर महीने 500 रुपये भी पेमेंट करता है। केरल में ऐसी घटना भी देखने को मिल रही ये आश्चर्य की बात है।

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पश्चिम बंगाल से मजदूरी के लिए आया केरला
आज की तारीख में लोग कमाने के लिए कितनी दूर-दूर से आकर बसते हैं। यूपी-बिहार के लोग कमाने के लिए मुंबई, गुजरात तक दौड़ रहे हैं। ऐसे ही पश्चिम बंगाल का श्याम सुंदर भी केरल में लेबर के काम के लिए आया है। प्रवासी मजदूर श्याम सुंदर यहां केरल के एर्नाकुलम में एक छोटे से तंग कमरे में जिंदगी गुजारने को मजबूर है। मकान मालिक ने उसे 500 रुपये के किराए पर वह स्थान रहने के लिए दिया है। एशियानेट न्यूज की रिपोर्ट के बाद पुलिस और स्थानीय लोग को इसकी जानकारी हुई जिसके बाद नगर निग के अफसर और कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे तो देखकर दंग रह गए। 

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चार साल से केरल में मजदूरी कर रहा श्याम सुंदर
एशियानेट की टीम ने एक पिरावोम में एक घर का दौरा किया। वहां देखा कि पश्चिम बंगाल से आया प्रवासी मजदूर श्याम सुंदर बहुत छोटे से केनल जो एक पुराने घर के पास ही था, उसमें रह रहा था। लोहे कि ग्रिल से बना दरवाजा खुला ही हुआ था जिससे उसके घर के अंदर की स्थिति साफ दिख रही थी। वह चार साल से केरल में रहकर मजदूरी कर रहा है। 

500 रुपये किराये पर दिया कैनल
श्याम सुंदर ने कहा इस घर के मालिक ने पुराने केनेल को उसे 500 रुपये के किराए पर रहने के लिए दे दिया। वैसे से वह कोलकाता का रहने वाला है जो कि यहां से 6 घंटे के रास्ते पर है, लेकिन वह यहीं रहकर काम करता है। वह पढ़ा लिखा नहीं है। वह अधिक किराया नहीं दे सकता है इसलिए इसी छोटे कैनल में रहकर गुजारा करता है। 

छोटे से घर में सारा इंतजाम
श्याम सुंदर कहते हैं कि उन्होंने अपने छोटे से कैनल में किचन, बिस्तर और बैठने की जगह भी निकाल रखी है। जरूरत की हर चीज छोटे से कमरे में मिल जाएगी। कमरे में एक ग्रिल दरवाजा है और बारिश और ठंड से बचने के लिए कार्डबोर्ड से उसे ढक दिया गया है। इस घर का मकान मालिक भी पास में ही रहता है। वहीं कई और प्रवासी मजदूर भी रहते हैं जो 2 से 3 हजार किराया देते हैं लेकिन उन्हें भी अच्छा घर नहीं मिल पाता है। हालांकि मकान मालिक की माने तो श्यामसुंदर उस कैनल में रहते हैं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

जानकारी पर नगर निगम ने मामले को संज्ञान में लिया है। जबकि पुलिस ने मकान मालिक को इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है।