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मोदी ने लाल किले से इस नए मिशन का जिक्र किया, कहा- हम 70 साल में हुए काम का चार गुना 4 साल में करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने लाल किले से अपने भाषण में बाढ़ अनुच्छेद 370, तीन तलाक, जल शक्ति मंत्रालय, मेडिकल बिल, एक देश-एक चुनाव, किसान-गरीब, जल जीवन मिशन, जनसंख्या विस्फोट मुद्दों का जिक्र किया।

Modi mentioned this new mission on the 73rd Independence Day
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New Delhi, First Published Aug 15, 2019, 8:37 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने लाल किले से अपने भाषण में बाढ़ अनुच्छेद 370, तीन तलाक, जल शक्ति मंत्रालय, मेडिकल बिल, एक देश-एक चुनाव, किसान-गरीब, जल जीवन मिशन, जनसंख्या विस्फोट मुद्दों का जिक्र किया।  पीएम मोदी ने एक नए मिशन का जिक्र करते हुए देश से अपील की- 'जल संचय का अभियान स्वच्छ भारत जैसा अभियान बनना चाहिए। '

जल जीवन मिशन
प्रधानमंत्री मोदी जल संरक्षण के मुद्दे पर ज्यादा संवेदनशील नजर आए। उन्होंने कहा- पीने का पानी नहीं है, माता बहनों को किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जीवन का बड़ा हिस्सा पानी में खप जाता है, इसको बदलने की योजना बनाई जा रही है। जल जीवन मिशन पर काम करेंगे। इसमें देश के सभी राज्य से मिलकर काम करेंगे। उन्होंने अपने भाषण में कहा- इस मिशन के लिए 3.5 लाख करोड़ रुपए भी खर्च करेंगे। जल सरंक्षण, जल संचयन किया जाए। उन्होंने कहा- समुद्र के पानी, जल का ट्रीटमेंट किया जाएगा। वर्षा का संचयन के लिए भी प्लान तैयार करेंगे। पाठ्यक्रम में जल संग्रहण, पानी के श्रोतों को पुन: जीवित करेंगे। 70 साल में जो काम हुआ, उसका चार गुना चार साल में करेंगे। उन्होंने कहा कि ना हमें थकना है, ना थमना है, ना रुकना है, ना आगे बढ़ने से रुकना है।

जैन मुनी महाराज की सुनाई कहानी

पीएम मोदी ने एक किस्से का जिक्र करते हुए कहा- जब पानी समाप्त हो जाता है तो प्रकृति का काम रुक जाता है। एक तरह से विनाश शुरू हो जाता है। गुजरात में एक स्थान है महुरी। आज से करीब 100 साल पहले वहां एक जैन मुनि थे। वह एक किसान के घर में पैदा हुए। खेती करते थे। लेकिन वे जैन मुनी बने। उन्होंने लिखा है बुद्धिसागर जी महाराज ने कि एक दिन ऐसा आएगा जब पानी किराने की दुकान में बिकता होगा। आज हम पीने का पानी किराने की दुकान से लेते हैं। कहां से कहां हम पहुंच गए। न हमें थकना है न हमें रुकना है,  न हमें आगे बढ़ने से हिचकिचाना है। जल संचय का यह अभियान स्वच्छ भारत जैसा अभियान बनना चाहिए। 

उन्होंने कहा- अब हमारा देश उस दौर में पहुंचा है जिसमें बहगुत सी बातों से अब अपने आप को छिपाए रखने की बात नहीं है। हमें चुनौतियों को सामने से स्वीकार करना होगा। कभी राजनीतिक नफा नुकसान से हम फैसले करते हैं लेकिन इससे देश की भावी पीढ़ी का नुकसान होता है। इससे जुड़ा एक विषय है हमारे यहां जनसंख्या विस्फोट हो रहा है। एक जागरुक वर्ग है जो इस समस्या को भलिभांति समझता है। वह अपने घर में शिशु को जन्म देने से पहले सोचता है कि मैं शिशु के सपनों को पूरा कर पाउंगा, उसकी जरूरतों को पूरा कर पाउंगा या नहीं। एक छोटा वर्ग इन सारे पैरामीटर्स पर परिवार नियोजन करता है और देश का भला करने में सहयोग देता है। उनका जितना सम्मान करें, छोटा परिवार रखकर वो देशभक्ति करते हैं।

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