राष्ट्रपति शासन लगने के तीन दिन बाद नई सरकार की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई है। महाराष्ट्र में पहली बार सरकार बनाने के लिए शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के नेता साथ बैठे।  जिसमें शिवसेना की ओर से मंत्रालयों के बटंवारे का प्रस्ताव भी रखा गया है।

मुंबई. महाराष्ट्र की सियासत में जारी उठापटक के बीच राष्ट्रपति शासन लगने के तीन दिन बाद नई सरकार की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई है। गुरुवार को पहली बार सरकार बनाने के लिए शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के नेता साथ बैठे। जिसमें कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। असहमति के मुद्दे को दरकिनार कर महाराष्ट्र की जनता को ध्यान में रख कर सरकार का एजेंडा तैयार किया गया। सूत्रों के मुताबिक अंतिम फैसला सोनिया, पवार और उद्धव फाइनल करेंगे। ड्राफ्ट के मुताबिक शिवसेना ने जो प्रस्ताव रखा है इसमें जो बाते सामने आई है उसमें शिवसेना का सीएम होगा। कांग्रेस और एनसीपी के डिप्टी सीएम ढाई-ढ़ाई साल के लिए दोनो दल ले लें। कयास लगाए जा रहे हैं कि 17 नवंबर को सरकार गठन के ऐलान हो सकता है। 17 नवंबर के दिन ही शिवसेना को बनाने वाले स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है। 

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एनसीपी नेता नवाब मलिक ने क्या कहा?

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, कल तीनों दल राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को लेकर पेंच फंसा हुआ है कि कांग्रेस सरकार में आएगी या बाहर से समर्थन करेगी। कांग्रेस का कहना है कि वह शिवसेना के साथ नहीं जा सकते हैं। लेकिन ड्रॉफ्ट तैयार होने के बाद लगता है कि सहमति बन जाएगी।

एक नजर : सरकार बनने पर किस पार्टी को क्या मिलेगा

कुछ ऐसे होगा बंटवारा 

सूत्रो के मुताबिक तीनों दलों के नेताओं द्वारा की गई बैठक में सरकार को चलाने को लेकर मंथन किया गया। जिसमें शिवसेना की ओर से मंत्रालयों के बटंवारे का प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक गृह मंत्रालय और डिप्टी स्पीकर का पद एनसीपी, राजस्व और विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस को, वहीं वित्त, नगरविकास और विधानपरिषद अध्यक्ष शिवसेना अपने पास रखना चाहती है।

संजय राउत ने फिर साधा निशाना

अपने शेरों शायरी से महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान मचाने वाले शिवसेना के सांसद संजय राउत ने एक बार फिर नई कविता के जरिए सरकार बनने की ओर इशारा किया है। इसे बीजेपी पर हमला भी माना जा रहा है। संजय राउत ने ट्विटर पर लिखा, ''बन्दे है हम उसके हम पर किसका जोर, उम्मीदों के सूरज निकले चारो ओर।'' बता दें कि संजय राउत पिछले कुछ दिनों से लगातार शायरी और कविताओं के जरिए निशाना साध रहे हैं। 

अब तक स्थिति नहीं हो सकी साफ 

बता दें कि यही वो मुद्दे हैं जिन पर 21 दिनों तक महाराष्ट्र में राजनीतिक ड्रामा चला और अब भी जारी है। शिवसेना अपनी जिद पर कायम है। बात बाला साहेब ठाकरे की कसम तक जा पहुंची है। संजय राउत 18 फरवरी 2019 की उस मीटिंग की याद दिला रहे हैं जिसमें उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच बातचीत हुई थी। राउत के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच बालासाहेब ठाकरे के कमरे में ही बात हुई थी। जबकि दो दिन पहले अमित शाह साफ कर चुके हैं कि सीएम पद के लिए चुनाव से पहले शिवसेना को कोई वादा नहीं किया गया था। 

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