पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड शेख सज्जाद गुल केरल और कर्नाटक में भी पढ़ा था। MBA और लैब टेक्नीशियन कोर्स करने के बाद वह कश्मीर लौटा और आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया।

Pahalgam Attack Update: (नई दिल्ली): 26 लोगों की जान लेने वाले पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड शेख सज्जाद गुल केरल और कर्नाटक में भी पढ़ा था। कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में शामिल होने से पहले वह केरल और कर्नाटक आया था। श्रीनगर में पढ़ाई के बाद उसने बेंगलुरु से एमबीए किया। फिर केरल में लैब टेक्नीशियन कोर्स किया। कश्मीर लौटकर उसने एक डायग्नोस्टिक लैब खोली और उसका इस्तेमाल आतंकी गुट को सहायता देने के लिए किया।

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सज्जाद अहमद शेख उर्फ गुल पाकिस्तान के रावलपिंडी में लश्कर-ए-तैयबा की शरण में छिपा है। 2020 से 2024 के बीच मध्य और दक्षिण कश्मीर में हुई हत्याओं, 2023 में मध्य कश्मीर में हुए ग्रेनेड हमलों, बिजबेहरा, गगनगीर और गंदरबल के जेड-मोड़ सुरंग में पुलिसवालों पर हुए हमलों समेत जम्मू-कश्मीर में हुई कई आतंकी घटनाओं में उसका हाथ माना जा रहा है।

अप्रैल 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुल को आतंकी घोषित किया था और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। पहलगाम हमले की साजिश में उसकी भूमिका की पुष्टि हो चुकी है। माना जाता है कि इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाला टीआरएफ उसके निर्देश पर काम कर रहा था। कहा जाता है कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट है और लश्कर-ए-तैयबा के कश्मीर प्रमुख के तौर पर काम कर चुका है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से 5 किलो आरडीएक्स के साथ गिरफ्तार किया था। उसने राजधानी में कई बम धमाकों की साजिश रची थी। 2003 में उसे दोषी पाया गया और 10 साल की सजा हुई। 2017 में रिहा होने के बाद वह पाकिस्तान चला गया। 2019 में आईएसआई ने उसे टीआरएफ का नेतृत्व सौंपा।

गुल के परिवार का आतंकवाद से पुराना नाता है। उसका भाई, जो श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल में डॉक्टर था, 1990 के दशक में आतंकवादी था। सऊदी अरब और फिर पाकिस्तान भागने के बाद अब वह खाड़ी देशों में आतंकवादियों को फंडिंग करता है।