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कश्मीर पर इस्लामिक देश तक हमारे साथ नहीं, दुनिया की चुप्पी हमारी कूटनीतिक हार: पाक मीडिया

जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान इस मुद्दे पर यूएन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मदद मांग चुका है। लेकिन उसे भारत की कूटनीति के सामने हर तरफ मुंह की खानी पड़ी।

pak media says, world silence over India  actions in kashmir reflects pakistan diplomatic failure
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New Delhi, First Published Aug 29, 2019, 9:29 AM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान इस मुद्दे पर यूएन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मदद मांग चुका है। लेकिन उसे भारत की कूटनीति के सामने हर तरफ मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और राष्ट्रपति राशिद आल्वी कश्मीर मुद्दे को लेकर युद्ध तक की धमकी दे चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार 'द डॉन' ने कश्मीर पर पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने को ना केवल इमरान सरकार की आलोचना की बल्कि इसे कूटनीतिक हार भी बताया है। 

'द डॉन' में पाकिस्तान के पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने लिखा, कश्मीर मसले पर इमरान खान अवाम की मदद मांग रहे हैं। वे खुद को कश्मीर का एम्बेसेडर बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे। लेकिन ये सिर्फ बयानबाजी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। इस मुद्दे पर नीति और गंभीरता का अभाव है। उम्मीद थी कि सरकार पहले तैयारी करेगी फिर कूटनीतिक और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे को रखेगी। लेकिन उनके पास विकल्प भी नहीं हैं। वे दुनिया को ये बताने में नाकाम रहे कि यह मसला परमाणु युद्ध की तरफ जा सकता है।

'मोदी की निंदा तो दूर यूएई मोदी को सम्मान दे रहा'
हुसैन लिखते हैं, इस मुद्दे पर दुनिया की चुप्पी सबसे बड़ी हैरानी है। कोई भी देश आठ करोड़ लोगों की आवाज उठाने के लिए तैयार नहीं है। कोई भी इस्लामिक देश, जो पाकिस्तान के करीबी हैं, वे भी हमारे साथ नहीं आया। मोदी की निंदा तो दूर यूएई ने तो इसी दौरान अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित कर दिया। 

'यूएनएससी में कश्मीर पर बैठक हमारी सफलता थी'
उन्होंने लिखा, ये सच है कि भारत बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, इसी वजह से गल्फ देशों में भी उसका प्रभाव बढ़ा है। पाकिस्तान के समर्थन खोने के पीछे एक वजह हमारी कूटनीतिक कमियां भी रहीं है। हमारे लिए केवल यही सांत्वना है कि ओआईसी (OIC) देशों द्वारा कश्मीर को लेकर चिंता जताई गई थी। कश्मीर मुद्दे पर जब यूएनएससी ने 50 साल में पहली बार कश्मीर मुद्दे पर बैठक की, तो यह हमारे लिए वास्तव में सफलता थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का बयान भी अहम था। लेकिन भारत पर कश्मीर को लेकर किसी भी देश ने दबाव डाला हो, ऐसा नजर नहीं आता। 

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