कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर एक बार फिर पाकिस्तान सरकार ने मेहरबानी दिखाई है। इमरान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन पर सिद्धू को निमंत्रण भेजा है। यह जानकारी खुद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने दी है। 

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर एक बार फिर पाकिस्तान सरकार ने मेहरबानी दिखाई है। इमरान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन पर सिद्धू को निमंत्रण भेजा है। यह जानकारी खुद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने दी है। 

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नवजोत कौर ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दफ्तर से सिद्धू को विशेष आमंत्रण मिला है। सिद्धू ने भारत सरकार से वहां जाने की अनुमति भी मांगी है। कौर ने कहा कि अगर भारत सरकार से अनुमति मिल जाती है, तो वे निश्चित ही वहां जाएंगे। 

पाक सांसद ने सिद्धू से की बातचीत
इमरान खान के निर्देश पर पाक सांसद फैसल जावेद खान ने सिद्धू से फोन पर बातचीत की और उन्हें 9 नवंबर को पाकिस्तान आने का निमंत्रण भेजा है। 

इमरान के शपथ ग्रहण में भी शामिल हुए थे 
इमरान खान ने अगस्त 2018 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इस मौके पर सिद्धू को उनकी ओर से निमंत्रण मिला था। कांग्रेस नेता ने इसे स्वीकार किया था और शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे। यहां वे पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल बाजवा से गले मिले थे, इसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। यहां तक की कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी यह पसंद नहीं आया था। 

9 नवंबर को कॉरिडोर का होना है उद्धाटन
9 नवंबर को कॉरिडोर का उद्धाटन भारत में पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान में इमरान करेंगे। इस मौके पर भारत ने 575 श्रद्धालुओं की लिस्ट पाकिस्तान को सौंपी है। ये श्रद्धालु कॉरिडोर के रास्ते करतारपुर साहिब पहुंचेंगे। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, हरसिमरत कौर बादल, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा कई सांसद और विधायक हैं। 

करतारपुर साहब में गुरुनानक देव ने बिताए थे 18 साल
करतारपुर साहब में गुरुनानक देवजी ने 18 साल बिताए थे। करतारपुर कॉरिडोर पंजाब के गुरदासपुर से तीन किमी दूर भारत-पाकिस्तान की सीमा से लगा है। नवंबर 2018 में दोनों देशों ने अपनी-अपनी ओर कॉरिडोर की नींव रखी थी। कॉरिडोर के अक्टूबर आखिर तक पूरे होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर से लाखों तीर्थयात्री गुरुनानक देवजी के स्थान तक जा सकेंगे। मौजूदा वक्त में श्रद्धालु भारत की सीमा से दूरबीन की मदद से गुरुद्वारा के दर्शन करते हैं।