गैंगस्टर अबू सलेम को 14 दिन की पैरोल देने से सरकार का इनकार, अब क्या बचा आखिरी रास्ता?
Abu Salem Parole Case: 1993 मुंबई बम धमाकों का दोषी अबू सलेम फिर सुर्खियों में है। भाई की मौत पर 14 दिन की पैरोल मांगने वाले सलेम को सरकार ने सिर्फ 2 दिन की इमरजेंसी पैरोल का प्रस्ताव दिया। क्या कोर्ट सुरक्षा से ऊपर मानवीय पहलू रखेगी?

मुंबई। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों में दोषी करार दिए जा चुके कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। अपने बड़े भाई की मौत के बाद 14 दिन की इमरजेंसी पैरोल मांगने वाले सलेम को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में साफ कहा है कि उसे सिर्फ 2 दिन की पैरोल ही दी जा सकती है। सरकार का तर्क है कि अबू सलेम एक “अंतरराष्ट्रीय अपराधी” है, इसलिए लंबी पैरोल सुरक्षा के लिहाज़ से संभव नहीं है।
सरकार क्यों कह रही है-14 दिन की पैरोल नहीं मिल सकती?
सरकार की ओर से पेश हुए वकील मनखुवार देशमुख ने कोर्ट को बताया कि जेल नियमों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक अबू सलेम को केवल दो दिन की इमरजेंसी पैरोल, वह भी पुलिस एस्कॉर्ट के साथ, दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एस्कॉर्ट का पूरा खर्च खुद सलेम को उठाना होगा। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और पुराने आपराधिक इतिहास को देखते हुए जोखिम नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अबू सलेम की मांग क्या है और उसकी दलील कितनी मजबूत?
अबू सलेम ने अपने आवेदन में कहा है कि उसके बड़े भाई अबू हकीम अंसारी का नवंबर 2025 में निधन हो गया था। वह अंतिम संस्कार और उससे जुड़ी धार्मिक रस्मों में शामिल नहीं हो सका। इसी कारण उसने 14 दिन की इमरजेंसी पैरोल मांगी थी। सलेम का यह भी कहना है कि कोर्ट की क्रिसमस छुट्टियों के कारण उसकी याचिका पर सुनवाई में देरी हुई।
वकील ने पुलिस एस्कॉर्ट पर क्यों उठाए सवाल?
सलेम की वकील फरहाना शाह ने सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि दो दिन की पैरोल बिल्कुल नाकाफी है, क्योंकि सलेम को मुंबई से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि सलेम पिछले 20 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है और भागने की कोई संभावना नहीं है। वकील के मुताबिक, पुलिस एस्कॉर्ट की जरूरत नहीं है और सलेम भारतीय नागरिक है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या रुख अपनाया?
इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की पीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 14 दिन की पैरोल देने पर अपनी आपत्तियों को लेकर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।
क्या पहले भी अबू सलेम को पैरोल मिली है?
अबू सलेम ने कोर्ट को बताया कि 2005 में गिरफ्तारी के बाद उसे बहुत ही सीमित मौकों पर पैरोल मिली है-केवल अपनी मां और सौतेली मां की मौत के समय। इसके अलावा उसे कभी लंबी पैरोल नहीं दी गई। अब सबकी नजर बॉम्बे हाई कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी है। क्या मानवीय आधार पर अदालत सलेम को राहत देगी, या सरकार की सुरक्षा चिंता भारी पड़ेगी?
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