वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में NDA के सुझाए बदलावों को मंजूरी मिल गई, जबकि विपक्ष के सुझावों को खारिज कर दिया गया। विपक्ष ने इस फैसले को तानाशाही बताया है।

नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 (Waqf (Amendment) Bill 2024) की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक सोमवार को हुई। इस दौरान केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन NDA के सांसदों द्वारा बताए गए सभी सुधारों को स्वीकार कर लिया गया। दूसरी ओर विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा सुझाए गए एक भी संशोधन को मंजूरी नहीं मिली।

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संसदीय समिति का नेतृत्व भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक के 14 खंडों में NDA सदस्यों द्वारा पेश किए गए संशोधनों को स्वीकार किया गया है। मौजूदा वक्फ कानून में प्रावधान है कि अगर किसी संपत्ति का इस्तेमाल धार्मिक काम में हो रहा है तो यूजर द्वारा इसके वक्फ के आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। नए कानून में इसे छोड़ दिया जाएगा।

कुछ संशोधनों में जिला मजिस्ट्रेटों के साथ-साथ राज्य सरकार के अधिकारियों को भी कुछ निश्चित भूमिकाओं के लिए नियुक्त करने की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके साथ ही वक्फ न्यायाधिकरण के सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने के लिए कहा गया है।

NDA के 16 सांसदों ने संशोधनों के पक्ष में किया मतदान

सोमवार को खंड-दर-खंड मतदान में NDA के 16 सांसदों ने संशोधनों के पक्ष में मतदान किया। वहीं, 10 विपक्षी सदस्यों ने उनके खिलाफ मतदान किया। विधेयक के सभी 44 खंडों पर विपक्ष के संशोधनों को 10:16 बहुमत से हरा दिया गया।

कल्याण बनर्जी ने कहा- हुई तानाशाही

JPC ने घोषणा की कि मसौदा रिपोर्ट 28 जनवरी को बांटा जाएगा। इसे 29 जनवरी को अपनाया जाएगा। विपक्षी सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की आलोचना की है। इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान कहा है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि बैठक में जो कुछ हुआ वह हास्यास्पद है। हमारी बात नहीं सुनी गई। तानाशाही तरीके से काम किया गया।