NEET पेपर लीक पर हुए 'संसद चलो' मार्च की NIA से कोर्ट-निगरानी में जांच की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में इसे संगठित हिंसा और विदेशी फंडिंग से जुड़ी बड़ी साजिश बताया गया है।
नई दिल्ली [भारत], 22 जुलाई (ANI): कथित NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए "संसद चलो" प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि यह घटना केवल छात्रों का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि इसमें संगठित हिंसा शामिल थी। साथ ही इसमें राजनीतिक नेताओं की भूमिका, कथित विदेशी फंडिंग और संभावित बड़ी साजिशों पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में इस घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को एक विशेष जांच एजेंसी को ट्रांसफर करने और कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
यह जनहित याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने वकील स्नेह वर्धन और प्रतिभा सिन्हा के माध्यम से दायर की है। इसमें प्रतिवादी के तौर पर भारत संघ, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली की NCT सरकार को शामिल किया गया है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका के अनुसार, कथित NEET पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन 6 जून, 2026 को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। इसमें कहा गया है कि यह आंदोलन बाद में 20 जुलाई को "संसद चलो" मार्च में बदल गया, जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर संसद भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस घटना के परिणामस्वरूप हिंसा, पथराव, पुलिस कर्मियों को चोटें, पत्रकारों पर हमले, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हुई।
विशेष एजेंसी से जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने NIA या किसी अन्य विशेष जांच एजेंसी को 20 जुलाई की घटना की जांच करने के निर्देश देने की मांग की है, जिसमें संसद क्षेत्र में घुसने का कथित प्रयास, पुलिस कर्मियों पर हमले और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा शामिल है। याचिका में दिल्ली पुलिस द्वारा इस घटना के संबंध में दर्ज सभी FIR को जांच एजेंसी को ट्रांसफर करने की भी मांग की गई है। इसमें आगे कोर्ट से अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वे हिंसा, बर्बरता, आपातकालीन सेवाओं में बाधा डालने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की पहचान करें, जहां भी आवश्यक हो FIR दर्ज करें और कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
राजनीतिक और विदेशी साजिश का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जो विरोध NEET परीक्षा को लेकर शुरू हुआ था, वह बाद में राजनीतिक दलों और अन्य समूहों से प्रभावित हो गया। इसमें दावा किया गया है कि कई राजनीतिक नेताओं ने विरोध स्थल का दौरा किया और यह प्रदर्शन अब छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन नहीं रह गया था। इसमें विदेशी वित्त पोषित संगठनों की संलिप्तता के बारे में भी आरोप लगाए गए हैं और उन दावों की जांच की मांग की गई है। ये आरोप याचिका के साथ संलग्न अखबारों की रिपोर्टों पर आधारित हैं।
सोनम वांगचुक और अरुंधति रॉय का भी जिक्र
जनहित याचिका में कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के विरोध में शामिल होने का भी उल्लेख है और कुछ विदेशी संगठनों और संस्थानों के साथ उनके संबंधों के बारे में आरोप लगाए गए हैं। इसमें आगे लेखिका अरुंधति रॉय की भागीदारी का भी उल्लेख है और विरोध के दौरान कथित तौर पर दिए गए बयानों का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन पहलुओं की सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच की जानी आवश्यक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के एंगल से जांच हो
याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने एक एम्बुलेंस को रोका, पत्रकारों पर हमला किया, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कनॉट प्लेस इलाके में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा की। इसमें उन रिपोर्टों का भी उल्लेख है जिनमें कहा गया है कि विरोध के दौरान पुलिस कर्मी घायल हुए थे और तर्क दिया गया है कि इस घटना को एक सामान्य कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में मानने के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से जांचा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, हालांकि संविधान शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन उस अधिकार का उपयोग हिंसा, संपत्ति को नुकसान, आपातकालीन सेवाओं में बाधा डालने या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कार्यों को सही ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता है। PIL में तर्क दिया गया है कि 20 जुलाई के विरोध के आसपास की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की आवश्यकता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या कोई संगठित या बाहरी तत्व इसमें शामिल थे और सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जा सके। (ANI)
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