वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी। इस बैठक में कोरोना से जुड़े तमाम मेडिकल उत्पादों और दवाओं पर जीएसटी को कम करने का फैसला किया गया है। हालांकि, सरकार ने वैक्सीन पर 5% जीएसटी जारी रखी है। 

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी। इस बैठक में कोरोना से जुड़े तमाम मेडिकल उत्पादों और दवाओं पर जीएसटी को कम करने का फैसला किया गया है। हालांकि, सरकार ने वैक्सीन पर 5% जीएसटी जारी रखी है। हालांकि, सरकार के इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। इन पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार और पत्रकार कंचन गुप्ता ने जवाब दिया है। 

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दरअसल, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सिरकार ने ट्वीट कर कहा, मोदी वैक्सीन, मास्क, पीपीई और ऑक्सीजन पर कैसे टैक्स वसूल सकते हैं। क्या ये मोदी के जिझिया टैक्स हैं, जिन्हें उनके साम्राज्य में रहने के लिए अदा किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने डीजल, पेट्रोल और गैस के दामों से सरकार को होने वाले फायदे का भी जिक्र किया। सिरकार ने ये आरोप बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्र की एक खबर को शेयर करते हुए लगाए। 

GST पर पीएम मोदी नहीं, काउंसिल फैसला करती है- कंचन गुप्ता
जवाहर सिरकार के ट्वीट पर जवाब देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार और पत्रकार कंचन गुप्ता ने ट्वीट किया, पीएम मोदी जीएसटी चार्ज नहीं लगाते। जीएसटी पर जीएसटी काउंसिल फैसला करती है। इसमें सभी राज्य शामिल हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा, वैक्सीन पर 18% से 28% टैक्स था, इसे घटाकर 5% कर दिया गया है। इसे जीएसटी की भी मंजूरी मिली है। इतना ही नहीं कंचन गुप्ता ने जवाहर सिरकार से पूछा, क्या आपने भारत सरकार में रहते हुए अपना काम ईमानदारी से किया?

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मेरी आवाज को दबाया गया- अमित्र मित्र 
इससे पहले शनिवार को बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्र ने दावा किया कि काउंसिल की बैठक में हुए फैसलों का जब उन्होंने विरोध किया तो उनकी आवाज नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा, परिषद के फैसले की घोषणा के बाद उन्होंने बार-बार आपत्ति जताने की कोशिश की, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई। इसके अलावा वर्चुअल लिंक को काटते हुए बैठक खत्म कर दी। 

इतना ही नहीं, मित्र ने कहा, पीपीई किट, हैंड सैनिटाइजर, कोरोना प्रबंधन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन जैसी चिकित्सा आपूर्ति पर जीएसटी लगाना जन विरोधी और कठोर फैसला है।