प्रधानमंत्री मोदी ने मराठी साहित्य सम्मेलन में शरद पवार के प्रति आदर दिखाते हुए उन्हें पानी पिलाया और बैठने में मदद की। मोदी ने भाषाओं के बीच नफ़रत न फैलाने की अपील भी की और मराठी भाषा से अपने जुड़ाव का ज़िक्र किया।

नई दिल्ली: मराठी साहित्य सम्मेलन में अपने साथ बैठे महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता शरद पवार के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदार व्यवहार सबकी प्रशंसा का पात्र बना। पवार जी को प्यास लगी तो उनका गिलास खाली था। मोदी जी ने खुद बोतल खोलकर उनके गिलास में पानी डाला और उन्हें पानी पीने में मदद की। साथ ही, उन्हें बैठने में भी सहायता की। बाद में अपने भाषण में, उन्होंने कहा, ‘आज शरद पवार जी के निमंत्रण पर मैं यहाँ आया हूँ’।

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मोदी ने कहा- महाराष्ट्र की महान धरती पर, एक मराठी भाषी व्यक्ति ने 100 साल पहले आरएसएस का बीज बोया था। उस आरएसएस ने आज मुझ जैसे लाखों लोगों को देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है और संघ की वजह से मुझे मराठी भाषा और मराठी परंपराओं से जुड़ने का सौभाग्य मिला है।

भाषाओं में नफ़रत न फैलाएँ: मोदी की अपील
‘भारतीय भाषाओं के बीच कभी नफ़रत नहीं रही। इसलिए नफ़रत फैलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। भाषा के आधार पर भेदभाव करने वालों को मुँहतोड़ जवाब देते हुए भाषाओं ने एक-दूसरे को समृद्ध किया है’ ऐसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा।

उन्होंने कहा- यहाँ के विज्ञान भवन में शुक्रवार को आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कही। ‘भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा भाषाओं वाला देश है। यही विविधता हमारी एकता का सबसे बड़ा आधार है। भाषा के आधार पर भेदभाव की गलत धारणाओं से दूर रहकर, सभी भाषाओं को अपनाकर उन्हें समृद्ध बनाना हमारा सामाजिक दायित्व है’।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करना देशभर में त्रिभाषा फॉर्मूला थोपने की कोशिश है, ऐसा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने आलोचना की थी। केंद्र सरकार के हिंदी थोपने के खिलाफ डीएमके ने राज्यभर में अभियान भी चलाया था। इसके बाद ही प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया है।