PM मोदी ने अमित शाह के संसद भाषण की तारीफ़ की। शाह ने वोटर लिस्ट और चुनावी प्रणाली पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए ठोस तथ्य पेश किए और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को उजागर किया। 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद में गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की तारीफ़ की। यह भाषण उस समय आया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनावी प्रणाली पर सवाल उठाए और “वोट चोरी” के आरोप लगाए थे। मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि शाह ने इलेक्शन सिस्टम पर विपक्ष की चिंताओं को दूर करते हुए ठोस तथ्य पेश किए। मोदी ने कहा कि शाह ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती पर प्रकाश डाला और हाल के दिनों में फैल रहे झूठ को जनता के सामने रखा। उनके मुताबिक, शाह का भाषण न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता भी साबित करता है।

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अमित शाह ने संसद में क्या कहा?

शाह ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि भारत का चुनावी सिस्टम सुरक्षित, पारदर्शी और मजबूत है। उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में मौजूद प्रोसिजरल सेफगार्ड्स, ऐतिहासिक मिसालें और कानूनी फ्रेमवर्क की जानकारी देते हुए साबित किया कि चुनावी मैनिपुलेशन का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि वोटर रोल में सुधार और SIR (Special Intensive Revision) जैसी प्रक्रियाएं वोटर लिस्ट को साफ और शुद्ध रखने के लिए ज़रूरी हैं।

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SIR क्यों जरूरी है?

अमित शाह ने संसद में बताया कि SIR वोटर लिस्ट में मरे हुए, माइग्रेट या ट्रांसफर हुए लोगों को हटाने और नए वोटरों को शामिल करने का प्रोसेस है। उन्होंने इसके इतिहास की मिसाल भी दी। नेहरू के समय से SIR का इस्तेमाल हुआ। लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव के समय भी यह जारी रहा। केवल अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी सरकार में यह प्रक्रिया थोड़ी बदलकर समाप्त हुई। शाह ने बताया कि 2004-2025 के बीच SIR नहीं हुआ, और इसलिए वोटर लिस्ट का रिविजन और अपडेट जरूरी था।

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विपक्ष के आरोप और अमित शाह का जवाब

राहुल गांधी ने हरियाणा की वोटर लिस्ट के उदाहरण दिए, जिसमें एक ही घर के पते से 500 से ज़्यादा वोटर दिखाए गए थे। शाह ने स्पष्ट किया कि यह एक एकड़ के पुश्तैनी प्लॉट में कई परिवार अलग-अलग घरों में रहते हैं। उन्होंने बताया कि एक घर में तीन पीढ़ियों के सदस्य रह सकते हैं। बिहार के एक वोटर को कांग्रेस द्वारा गलत बयान देने के लिए मजबूर करने का भी शाह ने उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद वोट चोरी का सहारा लिया। शाह ने नेहरू, पटेल, और 1975 के इलाहाबाद हाई कोर्ट फैसले का ज़िक्र करते हुए दिखाया कि चुनावी प्रणाली पर हमेशा से बहस होती रही है।

क्या विपक्ष ने निष्पक्ष सवाल उठाए थे?

विपक्ष ने बार-बार सवाल उठाए और दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। शाह ने बताया कि SIR और वोटर रोल का अपडेट डेमोक्रेटिक संस्थाओं और जनता के भरोसे को मजबूत करता है। उन्होंने विपक्ष की हर तर्क को ठोस तथ्यों के साथ खारिज किया।

पीएम मोदी ने इसका क्या जवाब दिया?

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा: "होम मिनिस्टर श्री अमित शाह जी का शानदार भाषण। ठोस फैक्ट्स के साथ, उन्होंने हमारे चुनावी प्रोसेस के अलग-अलग पहलुओं, हमारी डेमोक्रेसी की ताकत पर रोशनी डाली और विपक्ष के झूठ को भी सामने लाया।" मोदी ने शाह के भाषण की सिंहावलोकन शैली और तथ्यपरक स्पष्टीकरण की तारीफ़ की।

अमित शाह के भाषण का क्या होगा असर?

विपक्ष के लोग कई बार विरोध करने और टोकने के बावजूद शाह ने भाषण को नियंत्रित रखा। संसद में SIR और वोटर लिस्ट की पारदर्शिता पर जोर दिया गया। वोटर रोल अपडेट के इतिहास और प्रक्रिया पर साफ़ प्रकाश डाला। शाह का भाषण दिखाता है कि भारत का चुनावी सिस्टम सुरक्षित और पारदर्शी है, और कोई भी आरोप बिना ठोस प्रमाण के जनता के भरोसे को कम नहीं कर सकता।