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मोदी ने 60वीं बार मन की बात की; बोले- युवा जातिवाद, अपना-पराया जैसे भेदभावों को पसंद नहीं करते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 60वीं बार मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, हम दो दिन बाद 21वीं सदी के तीसरे दशक में प्रवेश करेंगे। 

PM Modi says in Mann Ki Baat in the coming decade, young India will play a key role KPP
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New Delhi, First Published Dec 29, 2019, 11:13 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 60वीं बार मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, हम दो दिन बाद 21वीं सदी के तीसरे दशक में प्रवेश करेंगे। हमारे देश के युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत है। वे जातिवाद, अपना-पराया, स्त्री, पुरुष इन भेदभावों को पसंद नहीं करते। हम देखते हैं कि अगर कोई सिनेमा एयरपोर्ट में कतार के बीच में घुस जाता है तो युवा उसे सबसे पहले टोकते हैं। 

उन्होंने कहा, युवाओं में नए प्रकार की व्यवस्ता और सोच परिलक्षित करती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मेरा भरोसा युवा पीढ़ी पर है। इस आधुनिक जेनरेशन में है। उन्होंने विश्वास जताया था कि इन्हीं में से मेरे लोग निकलेंगे। युवावस्था सबसे अहम कालखंड होता है। आपका भविष्य और जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप युवावस्था का इस्तेमाल कैसे करते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत में यह दशक न केवल युवाओं के विकास का होगा, बल्कि युवाओं का विकास करने वाला साबित होगा। आने वाली 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती पर इस दशक में अपने दायित्वों पर चिंतन करे और इस दशक पर कोई संकल्प ले।

'महिलाओं में परिवार को आगे ले जाने का जज्बा'
पीएम मोदी ने कहा,  उत्तर प्रदेश के फूलपुर में कुछ महिलाओं ने अपनी जीवटता से हर किसी को प्रेरणा दी है। कुछ समय पहले तक फूलपूर की यह महिला गरीबी से परेशान थीं। लेकिन इनमें अपने परिवार को आगे ले जाने का जज्बा था। महिलाओं ने चप्पल बनाने का काम शुरू किया। इससे महिलाओं ने न सिर्फ अपने राह का कांटा दूर किया, बल्कि खुद को आत्मनिर्भर बनाया। मैं फूलपुर के लोगों का धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने महिलाओं से चप्पलें खरीदीं और महिलाओं की मदद की। मैंने लालकिले से 15 अगस्त को आग्रह किया था कि हम लोकल चीजें खरीदें। मेरा फिर से आग्रह है कि हम लोकल प्रोडक्ट्स को अपनी शान और प्रतिष्ठा से जोड़ सकते हैं, क्या हम इन्हें खरीदकर लाखों के जीवन में समृद्धि ला सकते हैं। क्या हम लोगों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

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