फ्रांस में गुरूवार को हुए आतंकी हमले को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही उन्होंने हमले में मारे गए पीड़ितों और फ्रांस के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं। बता दें कि फ्रांस में बीते 15 दिनों में दूसरी बार बड़ा आतंकी हमला हुआ है। फिलहाल अबतक हत्या की वजह पता नहीं चल पाई है। 

नई दिल्ली. फ्रांस में गुरूवार को हुए आतंकी हमले को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही उन्होंने हमले में मारे गए पीड़ितों और फ्रांस के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं। उन्होंने गुरूवार शाम ट्वीट कर कहा कि 'मैं फ्रांस में हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करता हूं जिसमें एक चर्च के अंदर, नीस में हुए जघन्य हमले भी शामिल हैं। पीड़ितों और फ्रांस के लोगों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत फ्रांस के साथ खड़ा है।

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दरअसल, फ्रांस में बीते 15 दिनों में दूसरी बार बड़ा आतंकी हमला हुआ है। फ्रांस के नीस शहर में एक अज्ञात हमलावर ने एक महिला का सिर कलम कर दिया और एक चर्च के बाहर 2 लोगों की चाकू मारकर हत्या कर दी। बता दें कि अबतक हत्या की वजह पता नहीं चल पाई है। इसी बीच शहर के मेयर क्रिस्टियन एट्रोसी ने इस घटना को आतंकवादी घटना बताया है। हालांकि ताजा जानकारी के अनुसार फ्रांस पुलिस ने हमला करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पकड़े जाने पर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहा था आरोपी

फ्रांस की पुलिस के मुताबिक, यह हमला बुधवार को हुआ है। जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने हमलावर को गुरुवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। उसे नीस के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी घायल हो गया था इसलिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि इस हमले का कनेक्शन पैगंबर मोहम्मद के कार्टून वाले विवाद से है या नहीं।

एंटी टेररिज्म एजेंसी ने क्या कहा?

हमले की जांच कर रही फ्रांस की एंटी-टेररिज्म एजेंसी का कहना है कि हमलावर अकेले ही काम कर रहा था। इसके द्वारा एक व्यक्ति की हत्या चर्च के भीतर की गई है जो चर्च का वॉर्डन था। नीस के मेयर क्रिस्टियन एट्रोसी ने इस घटना पर कहा है कि हमलावर पकड़े जाने के बाद अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगा रहा था। इसके बाद कोई शक नहीं है कि उसका मकसद क्या था। पुलिस ने बताया कि अब हम किसी और की तलाश नहीं कर रहे हैं। 

फ्रांस में 15 दिनों में दूसरा हमला?

इस हमले से करीब 13 दिन पहले, 16 अक्टूबर को फ्रांस में ठीक ऐसा ही हमला हुआ था जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति ने आतंकवादी हमला करार दिया था। दरअसल, 18 साल के अब्दुल्लाख अंजोरोव इस्लामिक कट्टरवादी ने 16 अक्टूबर को फ्रांस के एक शिक्षक की सिरकमल कर सिर्फ इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि शिक्षक ने पैगंबर मोहम्मद वाला कार्टून दिखाया था। शिक्षक सैमुएल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय पर यह कार्टून दिखा रहे थे। 

फ्रांस की संसद ने शिक्षक को दी श्रद्धांजलि

फ्रांसी के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हमले की जगह का दौरा किया था और इस सिलसिले में एक 'क्राइसिस सेंटर' भी बनाया। फिलहाल इस हमले की जांच आतंकरोधी टीम के वकील कर रही है। उन्होंने कहा था कि उनकी संवेदनाओं मृतक शिक्षक और उनके परिवार के साथ हैं। हालांकि उन्होंने शंका जताई कि ये एक आतंकी हमला हो सकता है। घटना के बाद फ्रांस की संसद में मृत शिक्षक को खड़े होकर सांकेतिक श्रद्धांजलि दी गई। फ्रांस की संसद ने भी इस हमले को 'बर्बर आतंकी हमला' बताया। इसके साथ ही फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने ट्वीट किया कि इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने का जवाब सिर्फ़ एकता और दृढ़ता से ही दिया जा सकता है।

दुनिया भर के मुस्लिम देशों में हो रहा फ्रांस का विरोध

पैगंबर मोहम्मद पर छपे कार्टून को लेकर विवाद जारी है। इस्लामिक देश राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां तक की दुनियाभर के मुसलमान फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। फ्रांस तुर्की से शुरू हुआ ये प्रदर्शन बांग्लादेश तक पहुंच गया। लेकिन इसी बीच फ्रांस की सरकार ने इस्लामिक अतिवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी है। फ्रांस सरकार ने बुधवार को यहां बाराकासिटी नाम के एक इस्लामिक चैरिटी ऑर्गनाइजेशन को बंद कर दिया। यह संस्था 26 देशों में करीब 20 लाख लोगों के लिए काम करती थी। राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों पहले ही साफ शब्दों में कह चुके हैं कि वे इस्लामिक कट्टरपंथ पर सख्ती से प्रहार करेंगे।