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पैरा-स्वीमर माधवी लता प्रथिगुडुपु की किताब पढ़कर पीएम मोदी ने लिखा पत्र, चिट्ठी पढ़कर हुईं भावुक...

माधवी लता ने लिखा है कि किताब के रूप में मेरे जीवन के अनुभवों को सामने लाने का मुख्य उद्देश्य विकलांग साथियों की आकांक्षाओं और उनके बारे में समाज की धारणा के बीच की बड़ी खाई को पाटना है। 

PM Modi wrote letter to Madhavi Latha Prathigudupu, the writer of Book Swimming against the tide
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New Delhi, First Published Oct 26, 2021, 7:02 PM IST
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नई दिल्ली। पैरा-स्वीमर माधवी लता प्रथिगुडुपु (Madhavi Latha Prathigudupu) की किताब "स्विमिंग अगेंस्ट द टाइड" (Swimming against the tide)को पढ़ने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने उनके संघर्षों को सराहा है। पीएम मोदी ने पत्र भेजकर माधवी लता की किताब को सराहते हुए लिखा है कि आपकी किताब आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा देने का काम करेगी जिससे उनके आत्मबल में वृद्धि होगी।

पीएम मोदी ने माधवी लता को लिखे पत्र में कहा कि आपने अपनी किताब में अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए शिकायत नहीं की बल्कि खुद के भीतर डेवलप आत्मविश्वास के बारे में बताया। आपने विपरीत परिस्थितियों को खुद के लिए कैसे मौका बनाया, इस संघर्ष गाथा से युवा पीढ़ी प्रेरित होगी। 

पीएम मोदी ने अपने लिखे पत्र में पैरालंपिक में खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और पदक जीतने की सराहना करते हुए आने वाले वर्षों में पैरा स्पोर्ट्स के लिए शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने बताया कि सरकार पैरा स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है। 

कौन हैं माधवी लता?

पैरालिंपियन माधवी लता प्रथिगुडुपु एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में कार्यरत हैं। वह पैरा-स्वीमर (Para-Swimmer) हैं। उन्होंने आत्मकथा लिखी है-स्वीमिंग अगेंस्ट द टाइड। आत्मकथा स्वीमिंग अगेंस्ट द टाइड एक खिलाड़ी की कहानी है, जिसने अपनी परिस्थितियों और शारीरिक अक्षमता को चुनौती देकर विजेता के रूप में उभरने के लिए बाधाओं को पार किया। 

पीएम के पत्र लिखे जाने पर हर्षित हैं माधवी लता

माधवी लता प्रथिगुडुपु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी किताब को पढ़ने के बाद पत्र लिखे जाने पर खुशी जाहिर की है। माधवी लता ने लिखा है कि किताब के रूप में मेरे जीवन के अनुभवों को सामने लाने का मुख्य उद्देश्य विकलांग साथियों की आकांक्षाओं और उनके बारे में समाज की धारणा के बीच की बड़ी खाई को पाटना है। लेकिन पुस्तक को प्रकाशित करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे देश के सर्वोच्च अधिकारियों के संज्ञान में ले जाना। इसी आशय से मैंने अपनी पुस्तक की एक प्रति भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी। लेकिन मुझे यकीन नहीं था कि मेरी किताब उनके संज्ञान में जाएगी या नहीं। कल जब मुझे पीएम मोदी का एक विस्तृत पत्र मिला तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। इस अच्छे भाव के लिए मैं अपने प्रिय प्रधान मंत्री जी को तहे दिल से धन्यवाद देती हूं।

जैसा कि पीएम मोदी ने उल्लेख किया है कि आजकल पैरालिंपिक के बारे में अधिक जागरूकता पैदा की जा रही है और पैरा एथलीटों के लिए समर्थन भी सीधे अनुपात में बढ़ रहा है। हालांकि, सभी इच्छुक विकलांग व्यक्तियों के लिए खेल को करियर के रूप में अपनाने और समान मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक समर्थन और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र प्राप्त करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन इसे हासिल करने के लिए सही दिशा में उठाए गए कदमों को देखकर खुशी हुई...

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