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जनवरी में आ जाएगी प्रणव दा की किताब दि प्रेसिडेंशियल इयर्स, कांग्रेस की स्थिति पर की गई है कड़ी टिप्पणी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब द प्रेसिडेंशियल इयर्स जनवरी में बाजार में आएगी। यह किताब पश्चिम बंगाल के एक गांव से देश के राष्ट्रपति भवन तक के उनके सफर के बारे में बताएगी।

Pranab mukherjee book The Presidential Years will available in market in January kpl
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New Delhi, First Published Dec 12, 2020, 8:37 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब द प्रेसिडेंशियल इयर्स जनवरी में बाजार में आएगी। यह किताब पश्चिम बंगाल के एक गांव से देश के राष्ट्रपति भवन तक के उनके सफर के बारे में बताएगी। हालांकि, किताब में कांग्रेस की स्थिति पर की गई टिप्पणियों से विवाद खड़े होने का अंदेशा है। रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित हो रही यह किताब पूर्व राष्ट्रपति की यादों की चौथी किश्त है। इनमें उन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए सामने आने वाली चुनौतियों और मुश्किल फैसलों के बारे में साफ किया है। 

रूपा पब्लिकेशन हाउस के मैनेजिंग डायरेक्टर कपीश जी. मेहरा ने कहा कि अगर प्रणब मुखर्जी इस समय होते तो पाठकों के बीच अपनी ऑटोबायोग्राफी पढ़ने के जोश को देखकर रोमांचित हो जाते। इस संस्मरण में प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दो सियासी विरोधी प्रधानमंत्रियों मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के साथ रिश्तों को साझा किया है। उन्होंने लिखा है कि उन्होंने दो बिल्कुल अलग प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया।

मनमोहन व मोदी के कार्यकाल की चर्चा 
प्रणब मुखर्जी ने लिखा है कि डॉ. मनमोहन सिंह गठबंधन को सहेजने के बारे में सोचते थे। इसका असर सरकार पर भी दिखता था। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने यही किया। वहीं, मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान शासन की निरंकुश शैली अपनाई। इससे सरकार, विधायिका और न्यायपालिका के बीच रिश्तों में कड़वाहट आ गई। उन्होंने लिखा कि सरकार के दूसरे कार्यकाल में ऐसे मामलों पर समझ बेहतर हुई या नहीं, यह तो समय बताएगा।

कांग्रेस पर सख्त टिप्पणियों से विवाद का अंदेशा 
अपनी किताब में पूर्व राष्ट्रपति ने कांग्रेस के बारे में भी सख्त टिप्पणियां की हैं। इस पार्टी के वे पांच दशक से ज्यादा वक्त तक सीनियर लीडर रहे थे। वह पार्टी के उन नेताओं की बातों का खुलकर खंडन करते हैं, जो यह मानते थे कि 2004 में प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री बने होते हो पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी हार से बच जाती। प्रणब मुखर्जी कहते हैं कि मुझे लगता है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी की लीडरशिप ने पॉलिटिकल फोकस खो दिया। जब सोनिया गांधी पार्टी के मामले नहीं संभाल पा रही थीं, तब सदन में मनमोहन सिंह की लंबे समय तक गैरमौजूदगी ने अन्य सांसदों के साथ व्यक्तिगत संपर्क खत्म कर दिए।

ओबामा से भी जुड़े किस्से का जिक्र 
प्रणब मुखर्जी ने इस किताब के जरिए राष्ट्रपति भवन के अंदरूनी कामकाज के तरीके भी उजागर किए। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए थे। यूएस सीक्रेट सर्विस इस बात पर अड़ गई थी कि ओबामा एक खास बख्तरबंद कार में सफर करेंगे, जिसे अमेरिका से लाया गया था। बजाय उस कार के, जिसे भारत के राष्ट्रपति इस्तेमाल करते हैं। प्रणब मुखर्जी ने लिखा है कि सीक्रेट सर्विस के अधिकारी चाहते थे कि मैं भी ओबामा के साथ उसी बख्तरबंद कार में यात्रा करूं। मैंने विनम्रता और मजबूती के साथ ऐसा करने से इनकार कर दिया। साथ ही होम मिनिस्ट्री से कहा कि वे अमेरिकी अधिकारियों बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में भारतीय राष्ट्रपति के साथ यात्रा करेंगे, तो उन्हें हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा करना होगा। इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।

किताब के तीन संस्करण पहले ही मार्केट में 
प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों पर तीन किताबें द ड्रामेटिक डिकेड- द इंदिरा गांधी इयर्स, द टर्बुलेंट इयर्स और द कोएलिशन इयर्स आ चुकी हैं। द ड्रामेटिक डिकेड में 1970 का दौर दिखाया गया है। इसमें प्रणब मुखर्जी ने अपनी राजनीति की शुरुआत, बांग्लादेश का बनना, इमरजेंसी लगना और कांग्रेस विरोधी राजनीति की शुरुआत के बारे में बताया है। द टर्बुलेंट इयर्स में 1980 के दशक का जिक्र है। तब संजय गांधी की अचानक मौत हुई थी। कुछ ही सालों में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की भी हत्या हो गई थी। देश और पार्टी में इस उथल-पुथल भरे दौर के बारे में बताया गया है। तीसरी किताब द कोएलिशन इयर्स में 1996 से बाद के 16 साल की कहानी है। यह किताब देश के राजनीतिक इतिहास के सबसे उतार-चढ़ाव वाले दौर की पड़ताल करती है। इनमें उन्होंने बताया था कि शरद पवार कांग्रेस से क्यों अलग हो गए थे।

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