दुनिया का सबसे महंगा आम कौन-सा है -क्या मियाज़ाकी आम सच में 3 लाख/किलो तक बिकता है? “सूरज का अंडा” इतना खास क्यों-क्या जापान की खेती तकनीक ही इसकी असली रहस्य है? भारत के नूर जहाँ और अल्फांसो आम भी इस रेस में हैं-क्या ये ग्लोबल लग्ज़री को टक्कर दे सकते हैं? क्या आम अब फल नहीं, लग्ज़री आइटम बन चुका है-आखिर इसकी कीमतों के पीछे कौन सा राज छिपा है?
मलकानगिरी / टोक्यो। आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता, लेकिन क्या आप किसी ऐसे आम की कल्पना कर सकते हैं जिसकी कीमत आपके हाथ में मौजूद प्रीमियम आईफोन या किसी लग्जरी बाइक से भी ज्यादा हो? जी हां, हम बात कर रहे हैं मियाज़ाकी (Miyazaki) आम की, जिसे वर्तमान में दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्म होने का गौरव हासिल है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जाती है।

अब तक यह माना जाता था कि जापान के मियाज़ाकी प्रांत की नियंत्रित और बेहद आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसे वातावरण में ही इसे उगाया जा सकता है। लेकिन इस बार प्रकृति और इंसानी जज्बे ने मिलकर एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने देश-दुनिया के कृषि वैज्ञानिकों और सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया है। ओडिशा के नक्सल प्रभावित और सुदूर इलाके मलकानगिरी के एक आदिवासी किसान देबा पधियामी ने अपने खेत में इस 'लाल सोने' की फसल उगाकर सनसनी फैला दी है।
चार साल का कड़ा तप और एक पेड़ पर लटके 'सूरज के अंडे'
जापान में इस जादुई आम को 'ताइयो नो तामागो' (Taiyo no Tamago) यानी 'सूरज का अंडा' कहा जाता है। इसके गहरे लाल चमकीले रंग, बेजोड़ रसीलेपन और 15% से अधिक मिठास के स्तर के कारण यह दुनिया का सबसे कीमती फल बना हुआ है। मलकानगिरी के आदिवासी किसान देबा पधियामी ने चार साल पहले इस पौधे को रोपा था। चार सालों की कड़ी मेहनत, दिन-रात की देखरेख और सावधानी के बाद आखिरकार उनके पेड़ पर 17 मियाज़ाकी आम पूरी तरह पककर तैयार हो चुके हैं। जैसे ही ये आम अपने असली रूबी जैसे लाल रंग में आए, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई। देबा पधियामी के लिए यह फसल सिर्फ एक कामयाबी नहीं, बल्कि एक भारी चुनौती भी बन चुकी है।
जब करोड़ों की फसल के लिए बढ़ानी पड़ी सुरक्षा: डर और सस्पेंस का माहौल
खेत पर पहरा और चोरी का खौफ: > जब प्रति किलोग्राम लाखों रुपये की कीमत वाले 17 बेशकीमती आम खुले आसमान के नीचे लटके हों, तो चोरों और असामाजिक तत्वों की नजर पड़ना लाजिमी है। देबा पधियामी के सामने इस वक्त सबसे बड़ा सस्पेंस और डर अपनी इस दुर्लभ फसल को सुरक्षित रखने का है। स्थानीय प्रशासन से लेकर किसान के परिवार तक, सभी इन आमों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और दिन-रात इसकी निगरानी की जा रही है। इस दुर्लभ फसल ने जहां लोगों का कौतूहल बढ़ाया है, वहीं किसान अब सरकार और प्रीमियम खरीदारों से मदद की गुहार लगा रहा है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की फसल की सही कीमत मिल सके और इसे सुरक्षित बाजार तक पहुंचाया जा सके।
आखिर क्यों इतनी बेहिसाब होती है मियाज़ाकी आम की कीमत?
मियाज़ाकी आम का इतना महंगा होने का राज इसकी खेती के बेहद सख्त और अनोखे तरीकों में छिपा है। जापान में इन आमों को उगाने के लिए हर एक फल को पेड़ पर ही एक विशेष जाली (Net) से बांधा जाता है।
- प्राकृतिक रूप से गिरना: इसे मैन्युअल रूप से नहीं तोड़ा जाता; जब फल पूरी तरह पक जाता है, तो वह खुद ब खुद जाली में गिर जाता है।
- सूरज की समान रोशनी: हर फल को समान रूप से धूप मिले, इसके लिए विशेष रिफ्लेक्टर लगाए जाते हैं।
- उपहार संस्कृति: जापान में इसे बेहद शानदार और शाही तोहफा देने के चलन के तहत प्रीमियम नीलामियों में बेचा जाता है।
- शाही प्रतिस्पर्धा: भारत के 'नूरजहां' और 'अल्फांसो' को टक्कर
मलकानगिरी में इस जापानी आम के उगने से भारत के अपने शाही आमों-जैसे मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का विशालकाय 'नूरजहां' (जिसकी कीमत 1,500 रुपये प्रति पीस तक होती है) और महाराष्ट्र के देवगढ़ का सुगंधित 'अल्फांसो' (हापुस)-के बीच एक दिलचस्प मुकाबला शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया के इस दौर में अब दुर्लभ फल सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और लग्जरी एक्सपीरियंस बन चुके हैं। देबा पधियामी की यह जादुई फसल यह साबित करती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो भारत की मिट्टी दुनिया का सबसे कीमती रत्न भी उगल सकती है। अब देखना यह है कि इन 17 'सूरज के अंडों' को कौन सा प्रीमियम खरीदार अपनी थाली की शान बनाता है!


