होसले मंगलवार को पुणे  के कांग्रेस अध्यक्ष रमेश बागवे को अपना आवेदन सौंपने से पहले कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगे। 

पुणे। कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद से ही पार्टी एक नए प्रेसिडेंट की तलाश में है। इसी बीच, पुणे के एक इंजीनियर ने कांग्रेस का अध्यक्ष बनने की ख्वाहिश जताई है। 28 साल के इस शख्स का नाम गजानंद होसले है। गजानंद का कहना है कि उनके पास पार्टी को फिर से जिंदा करने का ब्लूप्रिंट है। होसले मंगलवार को पुणे के कांग्रेस अध्यक्ष रमेश बागवे को अपना आवेदन सौंपने से पहले कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगे। 

कांग्रेस को फिर से जिंदा करने की जरूरत…
गजानंद का कहना है- ‘‘राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ चुके हैं और दोबारा पद संभालना नहीं चाहते। ऐसे में पार्टी के भीतर इस बात को लेकर खींचतान है कि आखिर नया अध्यक्ष किसे चुना जाए। मैं इस पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करना चाहता हूं। आज के समय में कांग्रेस को एक बार फिर से जिंदा करने की जरूरत है। राहुल खुद चाहते हैं कि पार्टी को युवा नेतृत्व मिले। मुझे भी लगता है कि पार्टी का अध्यक्ष न सिर्फ सोच और उम्र से युवा हो बल्कि उसके काम करने का तरीका भी वैसा ही होना चाहिए।’’

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कोई राजनीतिक अनुभव नहीं…
गजानंद पुणे की एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में बतौर मैनेजर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इससे पहले उन्हें किसी भी पार्टी या सामाजिक संगठन में काम करने का अनुभव नहीं है। महात्मा गांधी, कार्ल मॉर्क्स और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए होसले ने कहा कि इन तीन महान लोगों के सिद्धांत अपनाकर भारत एक कल्याणकारी देश बन सकता है। 

गैर गांधी अध्यक्ष बना तो पार्टी टूट जाएगी…
पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह का कहना है कि अगर कोई गैर-गांधी अध्यक्ष बना तो पार्टी टूट जाएगी। नटवर ने प्रियंका के सोनभद्र दौरे की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें पार्टी नेतृत्व की क्षमता है। प्रियंका ने यूपी में जो कुछ किया, वह काबिलेतारीफ है। वो गांव में रुकी रहीं, वह सब हासिल किया जो वह चाहती थीं। मुझे लगता है कि राहुल को अपना यह फैसला बदलना चाहिए कि बाहर का कोई व्यक्ति पार्टी संभाले। 

राहुल ने कहा था- किसी ने नहीं ली हार की जिम्मेदारी…
बता दें कि राहुल गांधी ने 25 जून को कहा था कि पार्टी को अपने नए अध्यक्ष का चयन कर लेना चाहिए। राहुल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था- मुझे इसी बात का दुख है कि मेरे इस्तीफे के बाद किसी सीएम, महासचिव या प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया।