मोदी सरकार के कृषि बिल के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। हरियाणा और पंजाब के किसान सड़कों पर हैं और कृषि से जुड़े तीन बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच पंजाब के मुक्तसर स्थित बादल गांव में प्रदर्शन कर रहे किसान ने जहर खा लिया।

मुक्तसर. मोदी सरकार के कृषि बिल के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। हरियाणा और पंजाब के किसान सड़कों पर हैं और कृषि से जुड़े तीन बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच पंजाब के मुक्तसर स्थित बादल गांव में प्रदर्शन कर रहे किसान ने जहर खा लिया। खास बात यह है कि किसान ने पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल का गांव है और उनके घर के बाहर ही किसान धरना दे रहे थे। 

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घर के बाहर धरने पर बैठे किसान ने पी लिया जहर

बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के घर के बाहर धरने पर बैठे प्रीतम सिंह नामक किसान ने आज सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर जहर पी लिया। वह मानसा के अकाली गांव का रहने वाला है। प्रीतम सिंह को सबसे पहले बादल गांव के सरकारी अस्पताल में एडमिट कराया गया। इसके बाद उसे बठिंडा के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

इसलिए कर रहे विरोध

ये पूरा विवाद केंद्र के उन तीन कृषि विधेयकों को लेकर है, जिसमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (संरक्षण एवं सशक्तिकरण बिल) और आवश्यक वस्तु संशोधन बिल शामिल है। इन अध्यादेशों को लेकर यह कहा जा रहा है कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ही आमदनी का एकमात्र जरिया है, अध्यादेश इसे भी खत्म कर देगा। इसके अलावा कहा जा रहा है कि ये अध्यादेश साफ तौर पर मौजूदा मंडी व्यवस्था का खात्मा करने वाले हैं।

तीन महीने से किसान कर रहे अध्यादेश का विरोध

पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले तीन महीने से इन अध्यादेशों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। हालांकि, मोदी सरकार इन्हें किसान हितैषी बता रही है और अपने स्टैंड पर कायम है। इसके बावजूद इन विधेयकों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में किसान सड़क पर हैं। विपक्ष ने संसद शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि सदन में कृषि संबंधी अध्यादेशों का विरोध करेगी। अकाली दल ने भी बगावत का रुख अख्तियार कर लिया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि 'किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं। मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी।'