जिस पिता ने बेटियों को काबिल बनाया, ओल्ड-एज होम में उसकी खामोश मौत का सच! क्या समय की कमी थी या रिश्तों का अंत? वीडियो कॉल पर विदाई और 5,100 रुपये के पीछे छिपे दर्दनाक सच ने खड़े किए कई सवाल!

सोनीपत(हरियाण): जिस पिता ने अपनी तीन बेटियों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने और काबिल बनाने में अपनी पूरी ज़िंदगी खपा दी, उसकी मौत के बाद मिली अंतिम विदाई ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। सोनीपत के एक ओल्ड-एज होम में रह रहे वृद्ध टेक्सटाइल व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। हैरानी और दुख की बात यह रही कि उनकी एक भी बेटी उनके अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुई और वीडियो कॉल के ज़रिए दूर से ही पिता को अंतिम विदाई दी।

क्या आखिरी वक्त में भी नहीं पहुंचीं बेटियां?

हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुज़ुर्गों के अकेलेपन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई के पूर्व टेक्सटाइल कारोबारी शिवचरण राम रतन गुप्ता का एक ओल्ड-एज होम में लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोनीपत नहीं पहुंच सकीं और उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को अंतिम विदाई दी।

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ओल्ड-एज होम का अकेलापन और फोन की खामोशी

मूल रूप से मुंबई के रहने वाले पूर्व व्यापारी शिवचरण गुप्ता अपनी पत्नी मीना के साथ सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित 'समाज कल्याण शिक्षा समिति' द्वारा संचालित ओल्ड-एज होम में आए थे। पत्नी के निधन के बाद वह पूरी तरह अकेले पड़ गए। ओल्ड-एज होम के एडमिनिस्ट्रेटर आनंद कुमार के मुताबिक, गुप्ता जी अपने पास मौजूद फोन से बेटियों से बात करते थे, लेकिन सेहत बिगड़ने पर कॉल्स कम हो गईं। प्रबंधन ने बेटियों को 20 दिन पहले ही पिता की गंभीर हालत की जानकारी दी थी, लेकिन कोई भी मिलने नहीं आया।

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“हमें खाना खाना है...”वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार की रस्में

मंगलवार सुबह करीब 3:30 बजे निधन के बाद जब बेटियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आने में असमर्थता जताई और कहा कि उनके पास यात्रा करने का समय नहीं है।

  • नेपाल से ऑनलाइन रुपये: नेपाल में टीचर अनीता ने अंतिम संस्कार के इंतजामों के लिए ऑनलाइन ₹5,100 भेजे।
  • वीडियो कॉल पर विदाई: नेपाल, आजमगढ़ (यूपी) और मुंबई से तीनों बेटियां वीडियो कॉल पर जुड़ीं।
  • संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: अंतिम रस्मों के दौरान एक बेटी को कॉल पर यह कहते सुना गया, "इसमें और कितना समय लगेगा? हमें खाना खाना है और नहाना है।"

अस्थि विसर्जन से भी इंकार, लेकिन नेत्रदान की निभाई इच्छा

प्रबंधन और स्थानीय लोगों की मदद से अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। बेटियों ने बाद में सोनीपत आकर अस्थियां ले जाने से भी मना कर दिया और ओल्ड-एज होम से ही अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने का अनुरोध किया। हालांकि, इस भावुक घटना के बीच एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया। परिवार की सहमति से शिवचरण गुप्ता की आंखें दान की गईं, ताकि उनकी मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद को रोशनी मिल सके।

तीनों बेटियों को पढ़ाया, लेकिन अंतिम सफर में रहे अकेले

ओल्ड-एज होम के अनुसार, शिवचरण गुप्ता ने अपनी पूरी जिंदगी बेटियों की पढ़ाई और भविष्य संवारने में लगा दी थी। उनकी दो बेटियां शिक्षिका हैं और तीनों की शादी हो चुकी है। निधन के बाद परिवार ने पहले अस्थियां सुरक्षित रखने को कहा, लेकिन बाद में सोनीपत न आ पाने की बात कहते हुए गंगा में विसर्जन का अनुरोध कर दिया।

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