नई दिल्ली. राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्विटर और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपिनयों को तीसरे पक्ष के यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री पर मिले कानूनी संरक्षण को समाप्त करने के एक आदेश पारित किया है। इससे एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों के सिद्धांतों और नियमों पर ध्यान आकर्षित हुआ है, जिससे वे अपने मुताबिक प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को फिल्टर या प्रचारित करते हैं। 

उन्होंने कहा, ये सोशल मीडिया प्लेटफार्म एल्गोरिदम का इस्तेमाल करने के नाम पर लंबे वक्त तक जांच से बचे हैं। लेकिन इन्हें जांच के तहत लाया जाना चाहिए क्योंकि इसके एल्गोरिदम संविधान से मिले मौलिक अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन कर रहे हैं। 

एल्गोरिदम से मौलिक अधिकार का हनन कर रहे
जिस तरह से हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेगुलेट कर रहे हैं, वह गंभीर समस्या है। खासकर ट्विटर पर, हमारे भारतीय संविधान ने हमें बोलने की आजादी मौलिक अधिकार के तहत दी है। इसे केवल खास परिस्थियों के तहत आर्टिकल 19 (2) के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है। लेकिन इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने एल्गोरिदम बनाए हैं जिनके आधार पर किसी भी मैसेज का अधिक प्रचार किया जा सकता है या किसी को दबाया जा सकता है। 

कंटेंट में सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका 
इटीवी भारत से बातचीत में राजीव चंद्रशेखर ने कहा, यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है लेकिन एल्गोरिथ्म क्या है, इसे किसने बनाया है। अब एल्गोरिथम के जवाबदेही की आवश्यकता है। 

राजीव चंद्रशेखर पहले भी सोशल मीडिया कंपनियों के सिद्धांतों में पार्दर्शिता का मुद्दा उठा चुके हैं। वे इस तर्क को भी खारिज करते हैं, जिनमें कहा जाता है कि किसी मैसेज को रोकने या प्रसारित करने का फैसला सॉफ्टवेयर द्वारा होता है और सोशल मीडिया कंपनियों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।

एल्गोरिदम बनाने वाले पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकते हैं
उन्होंने कहा, यह कहना काफी नहीं है कि हम इसे नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे एल्गोरिदम है, उसी से सब कुछ हो रहा है। यह समझना भी जरूरी है कि एल्गोरिदम को एक इंसान द्वारा ही बनाया गया है। अगर वह शख्स पूर्वाग्रह से ग्रसित है तो एल्गोरिदम भी पूर्वाग्रह से ग्रसित होगी। 

बिजनेसमैन से राजनीति में आए राजीव चंद्रशेखर ने कहा, भारतीय रेगुलेटरों को सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, लिंक्डइन के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम की जांच करने में सक्षम होना चाहिए। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नियमों और प्रोग्राम में कथित पक्षपात को लेकर अमेरिका में एक बहस छेड़ दी है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया कंपनियों पर सार्वजनिक तौर पर फेक न्यूज फैलाने और अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का आरोप लगाया। 

भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर पहले से उचित प्रतिबंध
ट्रम्प ने अमेरिका में यह जिस हद तक किया है, वह इस बढ़ती धारणा का परिणाम है कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके संस्थापक और सीईओ के वैचारिक पूर्वाग्रह के आधार पर काम किया जा रहा है। 

राजीव चंद्रशेखर ने कहा, भारत के पास पहले से ही बोलने की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 (2) के तहत विशिष्ट परिस्थितियों में भारत में बोलने की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसलिए अन्य मामलों में स्पीच पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सेंसरशिप नहीं होना चाहिए क्योंकि यह अनुच्छेद 19 (1) के तहत मौलिक अधिकार है। संविधान सर्वोच्च है और कोई भी एल्गोरिथ्म संविधान को प्रभावित नहीं कर सकता है।

ये सिर्फ चुनाव ही नहीं व्यापार के परिणाम को भी प्रभावित करने में सक्षम
राज्यसभा सांसद ने कहा, सोशल मीडिया कंपनियां काफी हद तक जांच से मुक्त हैं, क्योंकि लोगों ने उन्हें तकनीकी नवाचारों के तौर पर लिया है। कुछ कंपनियों ने सरकार के साथ सहयोग किया। उन्होंने कहा, ये कंपनियां सिर्फ चुनाव के नतीजों को ही प्रभावित करने में सक्षम नहीं हैं, बल्कि वे व्यापार के परिणाम को भी प्रभावित करने में सक्षम हैं। ये बहुत शक्तिशाली कंपनियां हैं।  

उन्होंने कहा, "हमारे पास इन प्लेटफार्मों की अपनी निगरानी होनी चाहिए, चाहे वे भारतीय मंच हों, या वे विदेशी मंच हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे किसी भी छेड़छाड़ में लिप्त नहीं हैं।"