रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मानसून सत्र के लिए सरकार का एजेंडा तय करने के लिए एनडीए की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। 20 जुलाई से शुरू होने वाला यह सत्र हंगामेदार रहने की उम्मीद है, जिसमें विपक्ष नीट-यूजी पेपर लीक जैसे कई मुद्दों को उठाएगा।
नई दिल्ली [भारत], 16 जुलाई (एएनआई): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कल राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय संसदीय रणनीति बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में आगामी मानसून सत्र के लिए सरकार के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। सरकार ने 19 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें सरकार से अपने विधायी एजेंडे की रूपरेखा पेश करने की उम्मीद है, जबकि विपक्षी दल उन मुद्दों को सामने रख सकते हैं जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाने का इरादा रखते हैं। हर संसद सत्र से पहले होने वाली यह सर्वदलीय बैठक सुबह 11 बजे शुरू होने की संभावना है।
विपक्षी खेमे में बड़ी उथल-पुथल
सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार किए जाने की उम्मीद है। इस सत्र के हंगामेदार रहने की आशंका है, क्योंकि हाल के हफ्तों में कुछ विपक्षी दलों में दरार और "टूट" देखी गई है। विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल मची हुई है, जिसके 20 सांसदों ने "नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय" कर लिया है। उन्होंने लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है और कहा है कि वे भाजपा सरकार का समर्थन करेंगे। तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसदों ने अपनी राज्यसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया है और भाजपा में शामिल हो गए हैं। शिव सेना (यूबीटी) में भी और "विभाजन" हुआ है, लोकसभा में पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में "शामिल" हो गए हैं। राज्यसभा में सात आप सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
विपक्ष द्वारा नीट-यूजी पेपर लीक मामले और ऑपरेशन सिंदूर में हताहतों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी को उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले कहा था कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।
विवादास्पद विधेयक पर भी रहेगी नजर
प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से भी 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अपनाने की उम्मीद है, जिसे बाद में संसद में पेश किया जाएगा। इस विधेयक ने एक प्रावधान को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय या राज्य के मंत्रियों को पद से स्वतः हटाने का प्रावधान है। (एएनआई)
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