अयोध्या की स्थानीय अदालत ने राम मंदिर चंदा गबन मामले के सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उधर, श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है।

अयोध्या (उत्तर प्रदेश) [भारत], 29 जून (एएनआई): अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले में सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत का यह फैसला श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के धन के दुरुपयोग की रिपोर्टों पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई गहन जांच के बाद आया है।

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इस बीच, आरोपियों के परिवार वाले अपने परिजनों से मिलने जेल परिसर पहुंचते देखे गए। आरोपी टिंकू यादव के बेटे रवि यादव और आरोपी मनीष यादव के भाई शनि यादव अयोध्या जिला जेल पहुंचे, जहां आरोपी फिलहाल बंद हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

इससे पहले शुक्रवार को, श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने राम मंदिर के चंदे में कथित गबन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि इसके बाद, मंदिर के चंदे में कथित गबन की चल रही जांच के तहत पुलिस ने यहां राय का बयान दर्ज किया।

सूत्रों ने खुलासा किया कि चंपत राय से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिसमें अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, के बयान बाद में दर्ज किए जाएंगे।

SIT कर रही जांच, FIR में कई बड़े नाम

रविवार को, राम मंदिर चंदे में कथित गबन की जांच तेज हो गई, जब एक पुलिस टीम अयोध्या में आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला के आवास पर पहुंची। इससे पहले, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) ने एक आधिकारिक प्रेस बयान में कहा, "श्री राम मंदिर (अयोध्या) के संबंध में पिछले कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं से हम स्तब्ध, आहत और बहुत दुखी हैं। हम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और भक्तों को आश्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

ट्रस्ट ने यह भी घोषणा की कि उसे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे मिल गए हैं। यह घटनाक्रम अयोध्या में राम मंदिर में मिले चंदे के कथित गबन के सिलसिले में 25 जून को पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज किए जाने के बाद सामने आया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) शामिल हैं। एफआईआर में जिनके नाम हैं: अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिंकू यादव, मनीष यादव और अन्य।

राजनीतिक घमासान शुरू

यह मामला अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सामने आया, जिन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के चंदे में से 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये का गबन किया गया है। आरोपों के बाद, 14 जून को, राज्य सरकार ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर, राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एएनआई से कहा, "पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए; सरकार यह सुनिश्चित करेगी।" इस मामले ने उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि एसआईटी की जांच जारी है। (एएनआई)

(Except for the headline, this story has not been edited by Asianetnews Editorial staff and is published from a syndicated feed.)