दावणगेरे में एक फल विक्रेता दुग्गेश की हत्या उसके ही रिश्तेदार ने बीमा के पैसों के लिए कर दी। पुलिस ने आरोपी गणेश और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया है।

दावणगेरे: जन्म से भाई-बहन, रिश्तेदार। लेकिन, बड़े होते-होते दुश्मन बन गए, जैसे बीमा के पैसों के लिए खुद के साथ खेलकर बड़े हुए रिश्तेदार की हत्या कर दी। यह घटना दावणगेरे में घटी।

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दावणगेरे जिले के इमामनगर में यह घटना घटी। फल विक्रेता दुग्गेश की हत्या हुई है। बम्बू बाजार का गणेश (24), हरलय्या नगर का अनिल (18) पुराने चिक्कनहल्ली का शिवकुमार (25) और भारत कॉलोनी का मारुति (24) गिरफ्तार हत्या के आरोपी हैं। एक ही गली में जन्मे और पले-बढ़े दोस्त, रिश्तेदार दुग्गेश और गणेश दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगी बनाई। उनमें से बड़े भाई दुग्गेश ने स्थानीय स्तर पर फल बेचकर अपना जीवनयापन किया, आर्थिक रूप से मजबूत भी थे। रोजाना हजारों रुपये कमाते थे। गणेश कभी-कभी दुग्गेश को पैसे के मामले में कर्ज दिलाता था और ब्याज वसूल कर पैसा कमाता था, जिससे उसे कमीशन भी मिलता था।

कुछ दिन पहले दुग्गेश के भाई गोपी को 10 रुपये ब्याज दर पर 1 लाख रुपये दिए थे। शुरुआत में ब्याज का पैसा देने वाले गोपी बाद में कर्ज नहीं चुका पाए और बेंगलुरु चले गए। दुग्गेश ने अपना पैसा किसी और को दे दिया था, जब उसे पैसे की जरूरत पड़ी तो गणेश ने कुछ दस्तावेज लेकर कर्ज दिलाने की बात कही। दुग्गेश की बैंक पासबुक, हस्ताक्षरित चेक बुक, मोबाइल नंबर और दुग्गेश की मां की बैंक पासबुक और उनके अंगूठे का निशान वाली बैंक की चेक बुक भी ले ली।

बैंक से कर्ज दिलाने के बहाने सारे दस्तावेज लेकर दुग्गेश के नाम पर 8 महीने पहले (फरवरी) 40 लाख रुपये का जीवन बीमा कराया। मुश्किल से पहली किश्त का पैसा भी जमा किया। इसके बाद अगले 2025 जनवरी तक दुग्गेश के नाम पर चल रहे बीमा के लिए 2.09 लाख रुपये का प्रीमियम देना था। लेकिन दुग्गेश को पता नहीं था कि उसके नाम पर बीमा कराने का मकसद कुछ और ही था। इसलिए दुग्गेश और उसकी मां के हस्ताक्षर वाली चेकबुक, इंश्योरेंस बांड उन्हें नहीं दिए गए।

फल का व्यापार करने वाले दुग्गेश कहीं नहीं जाते थे। बैंक का कोई भी काम हो, तुम ही देख लेना, ऐसा कहकर हस्ताक्षर करके जरूरत पड़ने पर अपना मोबाइल लेकर ओटीपी बताने की जिम्मेदारी रिश्तेदार गणेश को दे देते थे। लेकिन मुर्गी सोने के अंडे देती है यह सोचकर उसका पेट काटने वाले क्रूर व्यक्ति की तरह गणेश ने दुग्गेश के नाम पर पैसे हड़पने की साजिश रची। दुग्गेश का बीमा कराकर, पहली किश्त चुकाने से पहले ही उसकी हत्या करके, बीमा के 40 लाख रुपये खुद हड़प सकते हैं, ऐसी योजना बनाई। इसलिए दुग्गेश के बीमा में उसकी मां को ही नॉमिनी बनाया गया था। अब दुग्गेश की मौत के बाद उसकी मां के बैंक खाते में आने वाले पैसे हड़पने के लिए उसकी मां के अंगूठे का निशान वाला चेक भी ले लिया था।

सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था, दुग्गेश की हत्या का दिन आ ही गया। तब रिश्तेदार गणेश अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ मिलकर दुग्गेश की हत्या की साजिश रचता है। योजना के मुताबिक दुग्गेश का व्यापार खत्म होने के बाद रात को शराब पीने के बहाने ले जाकर वापस आते समय बाइक से गिरकर उसकी मौत हो गई, ऐसी कहानी बनाई। लेकिन बेटे की मौत पर शक जताते हुए मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पोस्टमार्टम कराने पर गला घोंटकर हत्या करने का खुलासा हुआ। इस घटना के आरोपी को आजाद नगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।