रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने G7 देशों की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि वे खुद को महान क्यों समझते हैं? उन्होंने G8 की बैठक में शामिल न होने की वजह भी बताई। इतना ही नहीं, पुतिन ने जी7 से अधिक प्रासंगिक BRICS, SCO और G20 को बताया।

Putin on G7 Countries: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद प्रोटोकॉल तोड़ उन्हें रिसीव करने पालम एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद दोनों शीर्ष नेता एक ही गाड़ी में बैठकर दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पहुंचे, जहां मोदी ने प्राइवेट डिनर होस्ट किया। बता दें कि भारत यात्रा से पहले पुतिन ने क्रेमलिन में आज तक को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। पुतिन ने G7 देशों की अर्थव्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

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किस आधार पर खुद को महान बताते हैं G7?

क्या अमेरिकी अधिकारियों ने आपको G8 में शामिल होने के लिए कहा? इस सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा, मैंने इनकी बैठकों में जाना छोड़ दिया है। मुझे समझ नहीं आता कि ये G7 देश खुद को ग्रेट नेशन क्यों और किस आधार पर मानते हैं। पुतिन ने जर्मनी और ब्रिटेन की इकोनॉमी पर तंज कसते हुए कहा, यूरोप के ज्यादातर देशों में मंदी जैसे हालात हैं। जर्मनी की इकोनॉमी तो पिछले तीन साल से सुस्त पड़ी हुई है। भारत जी7 देशों से बड़ी और तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। पुतिन ने G8 की तुलना में ब्रिक्स, SCO और G20 जैसे सम्मेलनों को कहीं ज्यादा एक्टिव और प्रासंगिक बताया।

पुतिन ने G8 की बैठकों में जाना क्यों बंद किया?

इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने बताया, अमेरिकी बिजनेसमैन स्टीव विटकॉफ को उन्होंने बताया था कि आखिर जी8 की बैठक में जाना क्यों बंद किया। पुतिन के मुताबिक, 2012 में रूस में राष्ट्रपति चुनाव के बाद मैंने इस मंच से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि, बीच में वो कुछ वक्त के लिए इसमे शामिल हुए, लेकिन बाद में पूरी तरह बंद कर दिया। जी8 एक प्लेटफॉर्म है, इसे काम करते रहना चाहिए लेकिन दूसरे कई बड़े संगठन भी सामने आ रहे हैं। जहां तक बात जी8 से दूरी बनाने की है, तो रूस और यूरोपीय देशों के बीच फिलहाल रिश्ते नॉर्मल नहीं हैं, ये सब जानते हैं। ऐसे में अगर मैं जी8 सम्मेलन में जाना भी चाहूं तो उनसे क्या बात करूं, जबकि वो मुझसे बात करने में सहज नहीं हैं। मेरा मतलब, अगर मेंबर कंट्रीज के बीच डायलॉग की इच्छा ही नहीं है, तो ऐसी बैठक में भला सार्थक बातचीत कैसे हो सकती है।