सुप्रीम कोर्ट ने 1.5 लाख नागरिकों के मेडिकल डेटा लीक मामले में CBI जांच की याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। याचिका के अनुसार, संवेदनशील व्यक्तिगत और मेडिकल रिकॉर्ड सिंगापुर स्थित एक सर्वर पर ट्रांसफर किए गए हैं।
नई दिल्ली [भारत], 6 अगस्त (एएनआई): सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और संबंधित राज्यों को एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें एक बड़े मेडिकल डेटा ब्रीच और साइबर हमले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। इस मामले में 1.5 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत और मेडिकल रिकॉर्ड कथित तौर पर सिंगापुर स्थित एक सर्वर पर ट्रांसफर कर दिए गए थे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर को सुनने के बाद प्रतिवादियों से जवाब मांगा।
आईटी एक्ट में संशोधन की जरूरत पर जोर
सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों के लिए नए सिरे से विधायी समीक्षा की जरूरत हो सकती है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट ने पहले सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में संशोधनों की आवश्यकता की जांच करने का अनुरोध किया था।
पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गए सवाल
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कथित ब्रीच के संबंध में शिकायतें मार्च 2025 की शुरुआत में ही दर्ज करा दी गई थीं, लेकिन पुलिस ने अगस्त 2025 में ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। यह भी दलील दी गई कि याचिकाकर्ता द्वारा कथित तौर पर ब्रीच के स्रोत और उस विदेशी सर्वर, जहां डेटा ट्रांसफर किया गया था, का विवरण देने के बावजूद FIR अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ ही दर्ज है।
याचिका में इन कंपनियों पर आरोप
याचिका के अनुसार, बेसेमर वेंचर पार्टनर्स द्वारा प्रमोट की गई कंपनियां- रेमेडीनेट टेक्नोलॉजीज, IHX, मेडी असिस्ट और परफियोस- कथित तौर पर इस घटना से जुड़ी थीं। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि कथित ब्रीच में 1.5 लाख से अधिक नागरिकों की आधार डिटेल, पैन नंबर और मेडिकल रिकॉर्ड सहित संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी से समझौता किया गया था।
मामला सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई के लिए लंबित है। (एएनआई)
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