CM पेमा खांडू से जुड़े भ्रष्टाचार मामले की जांच में सहयोग न करने पर SC ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को तलब किया है। CBI की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ जांच में सहयोग न करने के सीबीआई के आरोपों पर राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को नोटिस जारी कर 24 अगस्त को पेश होने को कहा है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से इस पर अपना जवाब दाखिल करने को भी कहा है। शीर्ष अदालत ने पहले सीबीआई को उन आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया था, जिनमें कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश में लोक निर्माण के विभिन्न ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी फर्मों को दिए गए थे।

CBI से सहयोग न करने पर SC सख्त

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस बात पर गौर किया कि सीबीआई ने 17 जुलाई को एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि रिकॉर्ड देने के मामले में राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है। बेंच ने आदेश दिया, "सीबीआई की ओर से 17 जुलाई को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसे देखने से पता चलता है कि रिकॉर्ड देने के मामले में राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है। हम मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को नोटिस जारी करना उचित समझते हैं। हमने इसे 24 अगस्त, 2026 के लिए लिस्ट किया है। दोनों अधिकारी सीबीआई की उक्त रिपोर्ट पर अपने जवाब के साथ इस अदालत के समक्ष उपस्थित रहेंगे और यह भी बताएंगे कि इस अदालत के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है और असहयोग क्यों हो रहा है।"

अदालत का पिछला आदेश

इससे पहले, बेंच ने सीबीआई को नवंबर, 2015 से 2025 तक दिए गए ठेकों की जांच करने का निर्देश दिया था। बेंच ने अपने आदेश में कहा था, "सीबीआई दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू करेगी। प्रारंभिक जांच और उसके बाद की किसी भी जांच में 1 जनवरी, 2015 से 31 दिसंबर, 2025 की अवधि के भीतर लोक निर्माण, ठेकों और वर्क ऑर्डर के निष्पादन को शामिल किया जाएगा।" बेंच ने आदेश दिया था कि सीबीआई को उपरोक्त अवधि के बाहर के लेनदेन की जांच करने से रोका नहीं जाएगा। इसने आगे अरुणाचल प्रदेश राज्य को सहयोग करने और चार सप्ताह के भीतर सीबीआई को संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया था, "अरुणाचल प्रदेश राज्य सीबीआई को पूरा सहयोग करेगा। राज्य के मुख्य सचिव सीबीआई के साथ समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करेंगे। राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी रिकॉर्ड नष्ट न हो।" शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि कोई भी सबूत नष्ट नहीं किया जाएगा।

याचिका में क्या थे आरोप?

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश 'सेव मोन रीजन फेडरेशन' और 'वॉलंटरी अरुणाचल सेना' नामक संगठनों द्वारा दायर एक याचिका पर आया था। जनहित याचिका में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली फर्मों को सार्वजनिक कार्यों के लिए दिए गए ठेकों की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई थी। इस मामले में पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और उनके भतीजे सेरिंग ताशी को भी पक्षकार बनाया गया था। 2011 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में दोरजी खांडू की मृत्यु हो गई थी, जब वह मुख्यमंत्री थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि रिनचिन ड्रेमा की फर्म, ब्रांड ईगल्स को हितों के स्पष्ट टकराव के बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए हैं। जनहित याचिका में दावा किया गया था कि जब सरकारी ठेके केवल मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों की फर्मों को दिए जाने के सबूत हैं, तो यह अनुमान लगाना उचित है कि इतने बड़े पैमाने पर सरकारी ठेके का ऐसा पक्षपात संबंधित मंत्री की सीधी जानकारी, सहमति और सक्रिय समर्थन के बिना संभव नहीं हो सकता था। याचिका में कहा गया है, "इस विभाग के मंत्री 2011 तक पूर्व सीएम दोरजी खांडू थे और फिर इसका प्रभार उनके बेटे पेमा खांडू ने संभाला, जो अब वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि कुछ चुनिंदा फर्मों द्वारा बहुत सारे वर्क ऑर्डर निष्पादित किए गए हैं, जो खुद मंत्री और उनके परिवार के सदस्यों की हैं।" (एएनआई)

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