अमेरिका (America) द्वारा आयोजित 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' 10 दिसंबर को है। भारतीय अधिकारियों ने दावा किया है कि व्हाइट हाउस की तरफ से पीएम मोदी को 9 और 10 दिसंबर के बीच 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रण मिला है। 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) लोकतंत्र सम्मेलन में शिरकत करेंगे। यूएस (USA) में होने वाली समिट (Summit for Democracy) के लिए प्रेसिडेंट जो बिडेन (President Joe Biden) ने निमंत्रण भेजा है। इस वर्चुअल समिट में ताइवान (Taiwan), पाकिस्तान (Pakistan) समेत 110 देशों को शामिल होने के लिए निमंत्रण मिला है। लेकिन 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' के लिए चीन (China) को इनविटेशन नहीं मिला है। 

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10 दिसंबर को अमेरिका में समिट आयोजित

अमेरिका (America) द्वारा आयोजित 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' 10 दिसंबर को है। भारतीय अधिकारियों ने दावा किया है कि व्हाइट हाउस की तरफ से पीएम मोदी को 9 और 10 दिसंबर के बीच 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रण मिला है। इस बैठक में करीब 110 देश हिस्सा ले रहे हैं। ये वे देश हैं जहां लोकतांत्रित सरकारें शासन कर रही हैं।

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, अफगानिस्तान और म्यामांर को लेकर 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' में अहम चर्चा हो सकती है। दोनों देशों में हाल ही में लोकतांत्रिक सरकारों को उखाड़ कर सत्ता हासिल की गई है। इसके अलावा व्हाइट हाउस ने तीन प्रमुख विषयों का बैठक के लिए जिक्र किया है जिसमें 'अधिनायकवाद के खिलाफ बचाव', 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग' और 'मानवाधिकारों के लिए सम्मान बढ़ाना' शामिल है। 

निमंत्रण न मिलने से नाराज चीन

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' में 110 देशों को आमंत्रण दिया गया है। जिसमें दक्षिण और मध्य एशियाई क्षेत्र के चार देश भारत, मालदीव, नेपाल और पाकिस्तान भी शामिल हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि श्रीलंका, बांग्लादेश और भूटान देशों को भी आमंत्रण भेजा गया है या नहीं। उधर, इस बैठक में चीन को निमंत्रण नहीं मिला है। इससे उलट ताइवान को बैठक का आमंत्रण भेजा गया है। ताइवान के साथ तनाव को लेकर पहले से गंभीर चीन इस बात से खासा नाराज है कि अमेरिका ने चीन जैसे समृद्ध और लोकतांत्रिक राष्ट्र के बजाय ताइवान को तवज्जो दी है। 

6 दिसंबर को पुतिन संग पीएम की बैठक

आगामी 6 दिसंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच रहे हैं। रूस और भारत के बीच हर वर्ष शिखर वार्ता होती है। इस दौरान दोनों देश आपसी संबंधों की समीक्षा भी करते हैं। हालांकि पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते ये बैठक नहीं हो पाई थी। इसके अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों व रक्षा मंत्रियों की एक साथ मीटिंग होनी है।

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