सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों में आपराधिक छवि के उम्मीदवारों पर लगाम कसी है। कोर्ट ने पार्टियों को निर्देश दिया है कि अगर आप दागी उम्मीदवार को टिकट देते हैं तो 48 घंटों के अंदर बताएं कि आखिर आप ने एक आपराधिक छवि वाले को टिकट क्यों दिया। 

नई दिल्ली. दिल्ली चुनाव के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के लिए निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक दल आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को टिकट देने की वजह बताएं। इतना ही नहीं, इसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड भी करें। कोर्ट ने 48 घंटे की डेडलाइन भी तय की है। 

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- जस्टिस एफ नरिमन की अध्‍यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने राजनीतिक पार्टियों को यह निर्देश दिया। कोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक पार्टियां ऐसे उम्‍मीदवारों की जानकारी फेसबुक और ट्विटर जैसे तमाम सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म पर भी शेयर करें।

स्थानीय और राष्ट्रीय अखबारों में भी प्रकाशित करनी होगी जानकारी

कोर्ट ने निर्देश दिया, दागी छवि के उम्मीदवारों की जानकारी स्‍थानीय व एक राष्‍ट्रीय अखबार में भी प्रकाशित करना होगा। कोर्ट ने कहा, पिछले चार आम चुनावों में राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में चुने गए 43 विधायक (61%) दागी छवि के

11 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। इसमें 62 सीट पर आप और 8 पर भाजपा ने जीत हासिल की। चुने गए 70 विधायकों में से 43 ऐसे विधायक हैं, जिनके ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें से 5 भाजपा और आप के 38 विधायक हैं। सबसे ज्यादा 13 मामले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर दर्ज हैं। 

17वीं लोकसभा में 233 सांसदों पर आपराधिक मामले

17वीं लोकसभा के लिए चुने गए 542 सांसदों में से 539 सांसदों के शपथपत्रों का नेशनल इलेक्शन वॉच और एडीआर ने विश्लेषण किया था। इसमें पता चला कि चुने गए 233 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं। 19 सांसदों पर महिलाओं पर अत्याचार से जुड़े मामले दर्ज हैं। 3 सांसद ऐसे हैं, जिनपर बलात्कार से जुड़े मामले दर्ज हैं।