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राहुल गांधी को मोदी सरनेम केस में राहत देने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अधिकतम सजा पर उठाए सवाल, 10 प्वाइंट्स में जानिए पूरा फैसला
Modi surname defamation case: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राहुल गांधी के मोदी सरनेम पर कमेंट के खिलाफ हुई सजा पर सुनवाई की।'मोदी सरनेम' कमेंट को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में सूरत सेशन कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी। सुनवाई करते हुए बेंच ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी की हैं।
बेंच ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) के बयान अच्छे नहीं थे। याचिकाकर्ता को भाषण देने में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। लेकिन अधिकतम सजा क्यों दी गई यह नहीं बताया गया।
बेंच ने कहा कि अयोग्यता का प्रभाव न केवल व्यक्ति के अधिकार पर, बल्कि मतदाताओं पर भी पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकतम सजा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ट्रायल जज ने अधिकतम सज़ा सुनाई है। यदि सज़ा एक दिन कम होती तो अयोग्यता नहीं होती।
ट्रायल जज द्वारा अधिकतम सजा देने का कोई कारण नहीं बताया गया है, अंतिम फैसला आने तक दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगाने की जरूरत है।
जस्टिस बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में सुनवाई की। बेंच में जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस संजय कुमार थे। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने राहुल गांधी की पैरवी की।
गुजरात के सूरत कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल जेल की सजा दी थी। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने पहले सूरत अपर कोर्ट फिर गुजरात हाईकोर्ट में अपील की लेकिन राहत नहीं मिली। 7 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की अर्जी को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच 18 जुलाई को गांधी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुई थी। राहुल गांधी की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की थी।
राहुल गांधी ने 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली के दौरान कहा था, "सभी चोरों के सरनेम मोदी कैसे है?" इसके चलते भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत की थी। गुजरात के सूरत की एक कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी को दो साल जेल की सजा सुनाई थी।
फैसला आने के बाद 24 मार्च को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म कर दी गई थी।
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