नई दिल्ली. टूलकिट केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिशा रवि की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। एडिशनल सेंशन जज धर्मेंद्र राणा ने दिशा को 1,00000 रुपए की जमानत राशि पर जमानत दी। मंगलवार को टूलकिट केस में आरोपी निकिता जैकब, इंजीनियर शांतनु मुलुक और एक्टिविस्ट दिशा रवि को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। मंगलवार को जैकब और मुलुक से द्वारका में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने पूछताछ की थी। 

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए टूलकिट को लेकर दिल्ली पुलिस जांच कर रही है। इस केस में बेगलुरु से एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तार किया गया। वहीं निकिता जैकब और शांतनु मुलुक को अग्रिम जमानत मिल गई थी। 

कैसे रची गई 'टूलकिट साजिश'?
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि दिशा रवि ने सारे आरोप शांतनु-निकिता पर डाल दिए हैं। ऐसे में वो उन तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की जरूरत पड़ी। पुलिस ने बताया कि 17 और 18 जनवरी को भी जूम मीटिंग की गई और 23 को टूलकिट तैयार हुआ।

सोमवार को टूलकिट केस में आरोपी निकिता जैकब और शांतनु साइबर सेल पहुंचे थे। दोनों को दिल्ली पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। 

 

दिशा रवि बेंगलुरु के एक निजी कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक हैं। वह फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया नाम के एक समूह के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

टूलकिट केस क्या है? कब शुरुआत हुई
स्वीडन की 18 साल की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलनों के बीच ट्विटर पर एक टूल शेयर किया था। आरोप है कि टूलकिट में भारत में अस्थिरता फैलाने को लेकर साजिश का प्लान था। आंदोलन के दौरान ट्विटर पर हैजटैग के साथ क्या लिखें कि मैसेज वायरल हो जाए, आंदोलन के दौरान किन बातों का ध्यान रखें, गिरफ्तार होने पर क्या करें, कहीं फंसने पर क्या करें, ऐसे बहुत सारे सवालों के जवाब दिए गए थे। टूलकिट में ट्विटर के जरिये किसी अभियान को ट्रेंड कराने से संबंधित दिशानिर्देश थे। 

टूलकिट में 26 जनवरी हिंसा को लेकर एक बड़ा प्लान तैयार किया गया था। इसी संबंध में दिशा रवि के अलावा शांतनु और निकिता की तलाश में दिल्ली पुलिस थी।