नेशनल लेवल पर 6.3 प्रतिशत वैक्सीन का वेस्टेज हो रहा है। जबकि वैक्सीन की बर्बादी एक प्रतिशत से कम होनी चाहिए। 

नई दिल्ली। एक ओर देश में वैक्सीन के लिए मारामारी मची हुई है। केंद्र सरकार और राज्यों को वैक्सीन खरीदने में मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर राज्यों में बडे़ पैमाने पर वैक्सीन की बर्बादी हो रही है। वैक्सीन वेस्टेज के मामले में झारखंड और छत्तीसगढ सबसे आगे हैं। हालांकि, नेशनल लेवल पर बात करें तो 6.3 प्रतिशत वैक्सीन का वेस्टेज हो रहा है। जबकि वैक्सीन की बर्बादी एक प्रतिशत से कम होनी चाहिए। 

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झारखंड और छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वेस्टेज 

राज्यों को वैक्सीन नहीं मिल पा रहा फिर भी वैक्सीन का वेस्टेज रोकने के लिए संवेदनशील नहीं दिख रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वैक्सीन वेस्टेज में झारखंड सबसे ऊपर है। झारखंड में वैक्सीन का वेस्टेज करीब 37.7 प्रतिशत है। यहां 37.7 प्रतिशत डोज बर्बाद हो रहा है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है। यहां छत्तीसगढ़ में 30.2 प्रतिशत वैक्सीन डोज की बर्बादी हो रही है। 

इन राज्यों की यह है स्थिति 

वैक्सीन के वेस्टेज में तमिलनाडु तीसरे नंबर पर है। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 15.5 प्रतिशत का है। इसके बाद जम्मू कश्मीर में सबसे अधिक वैक्सीन वेस्टेज हो रहा है। यहां करीब 10.8 प्रतिशत वैक्सीन वेस्टेज हो रहा है। जम्मू कश्मीर के करीब-करीब बराबर मध्य प्रदेश भी है। मध्य प्रदेश में वैक्सीन का वेस्टेज 10.7 प्रतिशत है। 

झारखंड के सीएम ने कहा केंद्र का डेटा गलत 4.25 प्रतिशत वेस्टेज

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारे यहां वेस्टेज केवल 4.25 प्रतिशत है। केंद्र सरकार के पास कहां से आंकडा आया यह वह जानें। मैं खुद इसकी मानिटरिंग कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि हमको महज 48 लाख वैक्सीन मिले हैं। अगर इतना वेस्टेज हो जाता तो हम कैसे वैक्सीनेशन कराते। 

छत्तीसगढ़ ने भी कहा केंद्र टीम भेजकर जांच कराए

वैक्सीन वेस्टेज पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राज्यों से केंद्र सरकार डेटा ले नहीं रही है। ऐसे में वैक्सीन वेस्टेज का गलत डेटा उनके पास है। केंद्र सरकार सीधे वैक्सीनेशन सेंटरों से डेटा कलेक्शन कर रही है। कई सेंटर डेटा देने में देरी कर रहे हैं और यह वैक्सीन वेस्टेज में दर्ज हो जा रहा है। केंद्र सरकार एक टीम भेजकर हमारे राज्य में जांच करा सकती है। 

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