राज्यपाल डॉ.सीवी आनंद बोस ने कहा कि पीस रूम यानी शांति कक्ष, आवश्यकता का परिणाम है। मैंने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में दौरा करने के बाद इसकी आवश्यकता महसूस की। राज्य के कई हिस्सों में डराना, धमकाना और अत्यधिक हिंसा आम बात हो चुकी है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ.सीवी आनंद बोस ने पंचायत चुनाव में हिंसा प्रभावित लोगों के लिए हेल्पलाइन शुरू किया है। गवर्नर हाउस में ही हेल्पलाइन रूम बनाया गया है। यहां तैनात अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को कम से कम 300 से अधिक कॉल अटेंड किए गए। राजभवन में बनाए गए पीस रूम में फोन बिना रुके बज रहे हैं। उधर, राजभवन के इस रूख की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है।

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राज्यपाल डॉ.सीवी आनंद बोस ने कहा कि पीस रूम यानी शांति कक्ष, आवश्यकता का परिणाम है। मैंने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में दौरा करने के बाद इसकी आवश्यकता महसूस की। राज्य के कई हिस्सों में डराना, धमकाना और अत्यधिक हिंसा आम बात हो चुकी है। लोगों की मदद के लिए राजभवन में एक ऐसे हेल्पलाइन सेंटर की स्थापना की गई है जिस पर शिकायतें आ सके और उसके मुताबिक आवश्यक कार्रवाई भी हो सके।

पश्चिम बंगाल में डर का माहौल

राज्यपाल बोस ने कहा कि उन्होंने पीड़ितों, जान गंवाने वालों के परिवारों और अधिकारियों, राजनीतिक दलों, सरकार के प्रतिनिधियों और चुनाव आयोग से भी बात की है। मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि डर का माहौल है। ऐसे माहौल में सबसे अच्छा तरीका है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आम आदमी के लिए सुलभ हों। उन्हें एक जगह मिलनी चाहिए, जहां वे स्वतंत्र रूप से आ सकें और अपनी पीड़ा बयां कर सकें। इसलिए शांति कक्ष खोला गया है।

तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि राज्यपाल केवल विपक्ष की बात सुन रहे

उधर, तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि राज्यपाल केवल विपक्ष की बात सुन रहे हैं और उन्हें ऐसे कमरे बनाने का कोई अधिकार नहीं है। तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि हम राज्यपाल की कुर्सी का सम्मान करते हैं। लेकिन राज्यपाल को इस प्रकार के रूम स्थापित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। राज्यपाल भाजपा और विपक्ष के एजेंट की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

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