पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है। यह याचिका 77 जातियों को OBC सूची में शामिल करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इस वर्गीकरण को अवैध और असंवैधानिक बताया था।
OBC लिस्ट से 77 जातियों को हटाने का मामला
नई दिल्ली [भारत], 14 जुलाई (एएनआई): पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली, जिसमें 75 मुस्लिम समुदायों सहित 77 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने की राज्य की नीति को रद्द कर दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह कहने के बाद अपील वापस लेने की इजाजत दे दी कि राज्य कैबिनेट ने अपील वापस लेने का फैसला किया है।
हाल ही में, पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को नियंत्रित करने वाले पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों में संशोधन करते हुए दो विधेयक पारित किए थे।
क्या था हाईकोर्ट का फैसला?
इससे पहले, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने हाईकोर्ट के 22 मई, 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने 2010-12 के दौरान 77 जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के लिए राज्य के कई आदेशों को रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट ने 77 जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करने को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि यह वर्गीकरण "अवैध और असंवैधानिक" है। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ऐसा लगता है कि इस वर्गीकरण का एकमात्र मानदंड धर्म था, और इस कदम को चुनावी लाभ के लिए एक समुदाय को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास बताया था। (एएनआई)
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