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क्या है अटॉप्सी और कब की जाती है? सोनाली फोगाट को दिया जहर या हुई नेचुरल डेथ, जल्द आएगा सामने

सोनाली फोगाट (Sonali Phogat) का 23 अगस्त को निधन हो गया। उनके पीए सुधीर सांगवान ने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई थी। वहीं सोनाली के भाई रिंकू का आरोप है कि पीए सुधीर सांगवान और उसके साथी सुखविंदर ने जहर देकर हत्या की है। ऐसे में अब सोनाली की अटॉप्सी होगी। क्या है अटॉप्सी और किन हालातों में की जाती है?

What is autopsy, Sonali Phogat was given poison or natural death, will be revealed soon kpg
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First Published Aug 25, 2022, 4:43 PM IST

Sonali Phogat: बीजेपी लीडर और एक्ट्रेस रहीं सोनाली फोगाट (Sonali Phogat) का 23 अगस्त को निधन हो गया। सोनाली फोगाट के पीए सुधीर सांगवान ने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई थी। वहीं सोनाली के भाई रिंकू का आरोप है कि पीए सुधीर सांगवान और उसके साथी सुखविंदर ने जहर देकर हत्या की है। सोनाली की मौत क्या वाकई हार्ट अटैक से हुई या फिर उन्हें जहर देकर मारा गया, इस बात की जांच के लिए अब सोनाली के शव की अटॉप्सी (Autopsy) की जा रही है। आखिर क्या है अटॉप्सी और किन हालातों में की जाती है? आइए जानते हैं। 

क्या है अटॉप्सी?
अटॉप्सी का मतलब शव परीक्षा से है, जिसमें मृत शरीर (डेडबॉडी) का परीक्षण इस आधार पर किया जाता है कि किसी भी शख्स की मौत कैसे हुई और उसके क्या कारण रहे। अस्वाभाविक मौत की गुत्थियां सुलझाने के लिए या फिर आकस्मिक दुर्घटना में हुई मृत्यु, लावारिश लाशों या किसी भी झगड़े में हुई मौत के मामले में भी ऑटोप्सी यानी शवपरीक्षा कराई जाती है। 

दो प्रकार की होती है अटॉप्सी?
अटॉप्सी दो तरह की होती है। पहली होती है फिजिकल यानी शारीरिक और दूसरी दिमागी या साइकोलॉजिकल। फिजिकल अटॉप्सी में मृत शरीर का परीक्षण किया जाता है। वहीं, साइकोलॉजिकल अटॉप्सी में इस बात का टेस्ट किया जाता है कि किसी शख्स ने आत्महत्या की कोशिश क्यों की या फिर मौत से ठीक पहले किस तरह के हालात थे। इसके लिए इसमें मरने वाले के मेडिकल रिकॉर्ड्स, उसके दोस्तों और परिवारों से बातचीत कर यह पता लगाया जाता है कि मरने से पहले उस शख्स की मानसिक स्थिति क्या थी? 

क्या होता है साइकोलॉजिकल अटॉप्सी में?
सायकॉलजिकल ऑटोप्सी के दौरान मृत व्यक्ति से जुड़े लोगों से उसके बारे में सूचनाएं ली जाती हैं। इसमें उस शख्स के मोबाइल, डायरी, मैसेज, कॉल डिटेल्स आदि को चेक किया जाता है। इसके अलावा मृत व्यक्ति के व्यवहार और उसकी मानसिक स्थितियों का भी बारीकी से आंकलन किया जाता है। इसी आधार पर एक्सपर्ट्स इस बात का पता लगाते हैं कि यह हत्या थी या फिर आत्महत्या।

बेहद कम केसों में होती है साइकोलॉजिकल अटॉप्सी : 
सायकॉलजिकल ऑटोप्सी बेहद कम और रेयर केस में ही होती है। अभी तक सिर्फ तीन ही केस में इसे किया गया। इनमें सुनंदा पुष्कर केस, बुराड़ी हत्याकांड और सुशांत सिंह राजपूत का मामला है। 

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